सपा ने लखनऊ में निकाला वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पुतले फूंके

सपा ने लखनऊ में निकाला वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पुतले फूंके

लखनऊ ( आरएनएस )। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर 2 से 8 अक्टूबर तक चल रहे ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ और ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत गुरुवार को लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला। जिला कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकाले गए मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, सांसद, विधायक, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। मार्च का नेतृत्व जिलाध्यक्ष जयसिंह ‘जयन्त’ और जिला महासचिव शब्बीर अहमद खान ने किया।मार्च के कलेक्ट्रेट पहुंचने पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 का सार्वजनिक रूप से वाचन किया गया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के चार पुतलों का दहन किया। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। सपा के प्रदेश और जिला स्तर के नेता पहले भी इस अभियान के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा चुके हैं।मार्च में सांसद आरके चौधरी, विधायक रविदास मेहरोत्रा, राष्ट्रीय सचिव चौधरी जगदीप सिंह यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष सीएल वर्मा, पूर्व मंत्री सलाउद्दीन सिद्दीकी, रामसिंह राणा, निर्मल सिंह, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला सभा जूही सिंह, पूर्व विधायक गोमती यादव, राजेन्द्र यादव और अम्ब्रीष सिंह पुष्कर समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनके अलावा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय बहादुर यादव, ब्लॉक प्रमुख ऊषा सेन, प्रदेश सचिव विजय सिंह यादव, प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता सभा सिकन्दर यादव, जिला उपाध्यक्ष रामनरेश पाल, विधानसभा अध्यक्ष उमाशंकर वर्मा, छात्र नेता महेन्द्र यादव और विभिन्न फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी भी मार्च में शामिल हुए।सपा की ओर से 2 से 8 अक्टूबर तक चलाए जा रहे इस अभियान में जिला, विधानसभा और ब्लॉक स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि अभियान का उद्देश्य मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर जनजागरूकता बढ़ाना तथा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को मजबूती से उठाना है।

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