स्वच्छता कर्मियों का मानदेय 16 हजार रुपये, कटौती करने वालों पर होगी कार्रवाई: योगी
लखनऊ ( आरएनएस )। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता और जनभागीदारी की नई मिसाल कायम की है। पहले सफाई कर्मियों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता था, लेकिन अब स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने और स्वच्छता कर्मियों के योगदान को सम्मान देने की जरूरत व्यापक रूप से स्वीकार की गई है। स्वच्छ भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक नागरिक, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।मुख्यमंत्री गुरुवार को वाराणसी में आयोजित स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता कर्मियों पर पुष्प वर्षा की, उन्हें भोजन परोसा और उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में 600 से अधिक स्वच्छता मित्रों को सम्मानित किया गया, जिनमें से 11 कर्मियों को मुख्यमंत्री ने मंच पर सम्मानित किया।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्वच्छता कर्मियों के मानदेय में कटौती पर सख्ती से रोक लगाने का निर्णय लिया है। किसी भी कर्मी का मानदेय काटने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छता कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम की व्यवस्था की गई है। उनके लिए न्यूनतम 16 हजार रुपये मानदेय सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत उपचार की सुविधा, सुरक्षा बीमा और भविष्य निधि की व्यवस्था भी की गई है। दुर्घटना अथवा दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को आर्थिक सहायता मिल सकेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता कर्मियों को भविष्य के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना आवश्यक है। 60 से 65 वर्ष की आयु में काम करने में सक्षम न रहने पर उनके पास अपनी पूंजी होनी चाहिए, जिससे वे उपचार, दवा, भोजन और दूसरी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें। सरकार इन व्यवस्थाओं के माध्यम से उनके जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। नगर निगमों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्वच्छता मित्रों का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि वे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सबसे पहले काम पर पहुंचकर लोगों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराते हैं।उन्होंने कहा कि स्वच्छता कर्मी अपने परिवार और बच्चों को छोड़कर उस समय काम पर निकलते हैं, जब अधिकांश लोग सो रहे होते हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात, आंधी-तूफान और पर्व-त्योहारों के दौरान भी वे सड़कों और मोहल्लों की सफाई करते हैं। उनके परिश्रम से ही स्वच्छ वातावरण मिलता है और सार्वजनिक जीवन सुचारु रूप से चलता है। स्वच्छता कर्मी किसी भव्य इमारत की नींव के पत्थर की तरह हैं, जो दिखाई भले न दें, लेकिन पूरी इमारत उन्हीं पर टिकी होती है। उनके योगदान के बिना स्वच्छ शहर और स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में काशी का व्यापक कायाकल्प हुआ है। शहर अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए नए स्वरूप में आगे बढ़ रहा है। इस बदलाव को बनाए रखना और आगे बढ़ाना जनता तथा जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी लगातार चौथे वर्ष वार्ड प्रवास और स्वच्छता अभियान संचालित कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से जनप्रतिनिधि लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनने, वार्डों में पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और संबंधित विभागों के समन्वय से समाधान कराने का काम कर रहे हैं।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल विकास कार्य कराना नहीं है, बल्कि जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना, सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना और सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित करना भी है। सरकार बड़े निर्माण कार्य करा सकती है, लेकिन उनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी जनता तथा जागरूक समाज की होती है। सड़कों, गलियों और अन्य निर्माणों में टूट-फूट होने पर समय से मरम्मत कराई जाए तो उनकी उपयोगिता और आयु बढ़ती है। सार्वजनिक संपत्तियां जनता के हित में बनाई जाती हैं, इसलिए उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।उन्होंने कहा कि 19 जुलाई से दो अक्टूबर तक संचालित 76 दिवसीय वार्ड प्रवास कार्यक्रम स्वच्छता, जनजागरूकता और जनसंवाद की दिशा में अभिनव प्रयास है। बरसात के मौसम में जलभराव को लंबे समय तक नहीं रहने देना, नियमित सफाई करना और लोगों को जागरूक रखना जरूरी है। इससे डेंगू, कालाजार, मलेरिया और इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों द्वारा ऐसे प्रयास किए जाने से विकास कार्यों में जनता की भागीदारी बढ़ेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की पहुंच प्रशासनिक तंत्र से भी अधिक व्यापक हो सकती है। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और अन्य पदाधिकारियों के माध्यम से प्रत्येक घर तक पहुंच बनाई जा सकती है। लोकप्रिय जनप्रतिनिधि वही है, जो लोगों के सुख-दुख में सहभागी बने और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा रहे। जनप्रतिनिधियों को शिविर लगाकर निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और गरीब परिवारों को पेंशन, राशन कार्ड, आवास तथा अन्य सरकारी सुविधाओं से जोड़ना चाहिए। कई बार पात्र होने के बावजूद लोगों को योजनाओं की जानकारी नहीं होती। ऐसे में उन्हें जागरूक करना और लाभ दिलाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।उन्होंने बताया कि वार्ड प्रवास के दौरान आयोजित शिविरों में पात्र लोगों को पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा, श्रम योजनाओं और स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण शिविरों के माध्यम से भी लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। जाति, मत, संप्रदाय, भाषा और क्षेत्र का भेदभाव किए बिना प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचना चाहिए। यही सबका साथ, सबका विकास की भावना है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन के प्रत्येक विभाग की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर सकते हैं। नगर निगम, विकास प्राधिकरण, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों को ऐसे अभियानों में सहभागी बनना चाहिए। समस्याओं का समाधान संवाद से होता है। जनता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच सकारात्मक संवाद के साथ सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। वार्ड प्रवास अभियान इसका उदाहरण है कि निरंतर जनसंपर्क और विभागीय समन्वय से स्थानीय समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि मनुष्य प्रकृति से बहुत कुछ प्राप्त करता है, इसलिए उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भी जरूरी है। स्वच्छता अभियान के साथ वृक्षारोपण पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है। केवल कंक्रीट के जंगल खड़े करने से शुद्ध पर्यावरण सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है। वार्ड प्रवास अभियान के दौरान वृक्षारोपण के साथ नागरिकों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज महाकुम्भ-2025 में 66 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। इतने बड़े आयोजन को स्वच्छ, भव्य और दिव्य बनाने में स्वच्छता कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। महाकुम्भ के दौरान लोगों ने आयोजन की स्वच्छता की प्रशंसा की, लेकिन इसके पीछे दिन-रात मेहनत करने वाले कर्मियों को कई बार अपेक्षित पहचान नहीं मिलती। प्रयागराज महाकुम्भ की स्वच्छता हो या काशी की गलियों की सफाई, हर जगह स्वच्छता मित्रों का योगदान महत्वपूर्ण है। डॉ. नीलकंठ तिवारी द्वारा 76 दिवसीय अभियान में शामिल स्वच्छता मित्रों को सम्मानित करने की पहल इसी भावना को दर्शाती है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा के प्रति भी लोगों को जागरूक करना चाहिए। समाज की सक्रिय भागीदारी से ही विकास कार्यों का बेहतर परिणाम सामने आता है। डबल इंजन सरकार स्वच्छता कर्मियों के हितों की रक्षा और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में माफियाराज के प्रभाव को समाप्त कर गरीबों, वंचितों और दलितों के हितों की रक्षा की जा रही है। प्रयागराज में माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कराया जाएगा। कब्जे से मुक्त जमीन का उपयोग गरीबों के हित में किया जाएगा।विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र में लगातार चौथे वर्ष वार्ड प्रवास एवं स्वच्छता अभियान चलाया गया। आजादी के अमृत महोत्सव काल से शुरू हुई इस पहल के तहत पिछले वर्षों में 75 दिवसीय वार्ड प्रवास कार्यक्रम आयोजित किया जाता था, जबकि इस वर्ष इसे 76 दिनों तक संचालित किया गया। अभियान 19 जुलाई को शुरू हुआ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस, पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती तथा महात्मा गांधी की जयंती तक चला।कार्यक्रम में आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव और त्रिभुवन राम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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