(अहमदाबाद)लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल की हाई सिक्यॉरिटी ‘ब्लॉक 200Ó में किया गया शिफ्ट, देश के खतरनाक कैदियों संग रहेगा
अहमदाबाद ,27 अक्टूबर ,(आरएनएस)। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर शिकंजा कसने के लिए गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। उसे हाल ही में जेल के विशेष हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘दो सौ खोलीÓ (ब्लॉक-200) में शिफ्ट किया गया है। इस ब्लॉक में आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए या आरोपों का सामना कर रहे कैदियों को रखा जाता है। करीब 7.5म11 फीट की कोठरी में बंद लॉरेंस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
जेल के इस विशेष ब्लॉक को चार हिस्सों में बांटा गया है। प्रत्येक हिस्से में लगभग 50 कैदी रखे जाते हैं, ताकि उनके बीच संपर्क और एक कोठरी से दूसरी कोठरी तक आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके। यहां 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषियों समेत कई गंभीर अपराधों के कैदी भी बंद हैं।
लॉरेंस बिश्नोई पहले जेल में रहते हुए भी अपने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय रखने के लिए चर्चाओं में रहा है। वर्ष 2023-24 से पहले उसके खिलाफ जेल से रंगदारी के लिए फोन करने, धमकी भरे ऑडियो और वीडियो संदेश भेजने तथा अलग-अलग जेलों से साक्षात्कार देने के मामले सामने आते रहे। जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसकी ओर से सीधे फोन या बातचीत किए जाने की कोई घटना सामने नहीं आई है।
साबरमती जेल में शिफ्ट किए जाने से पहले लॉरेंस को ‘दस खोलीÓ नामक हाई-सिक्योरिटी हिस्से में रखा गया था, जहां केवल 10 कैदियों के रहने की व्यवस्था है। इससे पहले वह दिल्ली की तिहाड़ जेल और पंजाब की विभिन्न जेलों में भी बंद रह चुका है। इसी दौरान कॉल सेंटर संचालकों को धमकी देने वाली कथित रिकॉर्डिंग और गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ बातचीत के मामले भी सामने आए थे।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत लॉरेंस को अन्य कैदियों से अलग रखा गया है। उसके लोगों से मिलने-जुलने और डिजिटल माध्यमों तक पहुंच पर कड़ी पाबंदियां हैं। बताया जाता है कि वह अपनी कोठरी में अनुशासित दिनचर्या का पालन करता है। वह सुबह ध्यान लगाता है, नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, व्रत रखता है और शाकाहारी भोजन करता है।
जेल में रहते हुए बाहरी दुनिया से उसका संपर्क मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली अदालती सुनवाई और अपने वकील से कानूनी मामलों पर चर्चा तक सीमित बताया जाता है।
लॉरेंस बिश्नोई के जेल में अलग-थलग रहने के बावजूद उसके गिरोह की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बनी हुई है। दावा किया जाता है कि उसका सिंडिकेट विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत विदेशों से संचालित होता है। उसके करीबी गुर्गों का एक समूह कथित तौर पर सुरक्षित विदेशी ठिकानों से नेटवर्क के रोजमर्रा के कामकाज को संभालता है।
इस समूह पर नए लोगों की भर्ती करने, सदस्यों को काम सौंपने और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े इंतजामों का समन्वय करने के आरोप हैं। गिरोह के सदस्यों के बीच स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सूचनाएं साझा किए जाने की बात भी सामने आती रही है। ऐसे में साबरमती जेल में लॉरेंस की कड़ी निगरानी के बावजूद उसके कथित नेटवर्क की गतिविधियों पर अंकुश लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

