करवाचौथ पर वृद्धाश्रम में लौटी रौनक, सुहागिन दादियों के हाथों में सजी मेहंदी

करवाचौथ पर वृद्धाश्रम में लौटी रौनक, सुहागिन दादियों के हाथों में सजी मेहंदी

0 ‘हमारी उम्मीद मिशन’ की संस्थापक अवंतिका तिवारी ने बुजुर्ग महिलाओं के साथ साझा कीं पर्व की खुशियां

उरई (जालौन)। बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान लाना और उन्हें सम्मान व अपनत्व का एहसास कराना ही किसी संवेदनशील समाज की असली पहचान है। इसी भावना को साकार करते हुए करवाचौथ के अवसर पर जालौन स्थित वृद्धाश्रम में सुहागिन बुजुर्ग महिलाओं के हाथों में मेहंदी सजाई गई। जिलाधिकारी समीर की संवेदनशील सोच एवं बुजुर्गों के प्रति विशेष सरोकारों से प्रेरित इस पहल ने वृद्धाश्रम के वातावरण को खुशियों से भर दिया। ‘हमारी उम्मीद मिशन’ की संस्थापक एवं संचालिका अवंतिका तिवारी ने दादियों के बीच पहुंचकर उनके साथ पर्व की खुशियां साझा कीं।

करवाचौथ सुहाग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक पर्व है। इस दिन मेहंदी लगवाने की परंपरा हर सुहागिन महिला के लिए विशेष महत्व रखती है। इसी परंपरा से वृद्धाश्रम में रह रहीं बुजुर्ग महिलाओं को जोड़ते हुए उनके हाथों में मेहंदी रचाई गई। मेहंदी के सुंदर रंगों के साथ जब दादियों के चेहरों पर मुस्कान बिखरी तो माहौल में आत्मीयता और उल्लास की अनूठी छटा दिखाई दी। यह पल केवल श्रृंगार का नहीं, बल्कि उन्हें यह एहसास कराने का था कि उनकी खुशियां और भावनाएं भी समाज के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। जिलाधिकारी समीर द्वारा वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के जीवन में खुशियां लाने और समाज की नई पीढ़ी को उनके प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में विशेष रुचि ली जा रही है। इससे पहले भी ‘हमारी उम्मीद मिशन’ के बच्चों ने वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ समय बिताकर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आत्मीय संबंध विकसित किए थे। बच्चों और बुजुर्गों के बीच बने इस भावनात्मक जुड़ाव को जिलाधिकारी ने सराहा था। इसी संवेदनशील सोच की कड़ी में करवाचौथ पर दादियों के हाथों में मेहंदी सजाने की पहल ने खुशियों के नए रंग भर दिए। ‘हमारी उम्मीद मिशन’ की संस्थापक अवंतिका तिवारी शिक्षा के साथ बच्चों में मानवीय संवेदना, सामाजिक जिम्मेदारी और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए कार्य कर रही हैं। मिशन की यह पहल संदेश देती है कि बुजुर्गों की देखभाल केवल उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके साथ समय बिताना, उनकी भावनाओं को समझना और त्योहारों में उन्हें सहभागी बनाना भी उतना ही जरूरी है।

फोटो परिचय—

वृद्धाश्रम की सुहागिन दादियों के हाथों में मंेहदी लगाती छात्रायें।

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