(नई दिल्ली)भाजपा संगठन में बड़ा फेरबदल, विनोद तावड़े यूपी के प्रभारी नियुक्त; सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुग को गुजरात की जिम्मेदारी
नई दिल्ली ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। बीजेपी ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के चुनावों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति की है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की अगुवाई में घोषित नई राष्ट्रीय टीम में कई नए चेहरों को जगह दी गई है, जबकि चुनावी राज्यों की जिम्मेदारी अनुभवी नेताओं को सौंपी गई है।
पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया है। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है, ऐसे में चुनाव की कमान तावड़े को सौंपे जाने को अहम माना जा रहा है।
पंजाब विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद सतीश पुनिया को दी गई है। पंजाब में बीजेपी के सामने संगठन को मजबूत करने और अपने चुनावी आधार का विस्तार करने की चुनौती है। वहीं, राज्यसभा सांसद तरुण चुग को गुजरात विधानसभा चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है। चुग पहले भी पार्टी संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं, पूर्व आरएसएस नेता राम माधव और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पार्टी ने संगठन महामंत्री बीएल संतोष को उनके पद पर बरकरार रखा है। मीडिया की जिम्मेदारी अनिल बलूनी के पास ही रहेगी, जबकि सोशल मीडिया की कमान छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को सौंपी गई है।
बीजेपी के इस संगठनात्मक फेरबदल में आगामी विधानसभा चुनावों पर पार्टी का खास फोकस साफ नजर आ रहा है। यूपी, पंजाब और गुजरात में अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने चुनावी तैयारियों को और धार देने का संकेत दिया है।
00
(मुंबई)डिप्टी सीएम शिंदे के कार्यक्रम में बड़ी चूक, ‘वंदे मातरम्Ó की जगह बजा दिया लता मंगेशकर का गाना, 4 मिनट तक खड़े रहे लोग
मुंबई ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल सरकारी कार्यक्रम में उस वक्त बेहद असहज स्थिति पैदा हो गई, जब आधिकारिक ‘वंदे मातरम्Ó की जगह कोई और ही गाना बजने लगा। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह रही कि मंच पर खुद सूबे के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे मौजूद थे। इस भारी चूक के कारण पूरी सभा करीब चार मिनट तक मौन खड़ी रही। इस अजीबोगरीब घटना ने आयोजनकर्ताओं की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है, जिसके बाद खुद शिंदे को माइक संभालकर इस फजीहत के लिए माफी मांगनी पड़ी।
राष्ट्रगीत की जगह बजने लगा लता मंगेशकर का एलबम
दरअसल, ठाणे में आयोजित इस अहम सरकारी कार्यक्रम में जब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे मंच पर पहुंचे, तो प्रोटोकॉल के तहत कार्यक्रम की शुरुआत में ‘वंदे मातरम्Ó के गायन की घोषणा की गई। सम्मान में वहां मौजूद सभी लोग अपनी जगह पर सावधान की मुद्रा में खड़े हो गए, लेकिन तभी स्पीकर पर आधिकारिक गीत की जगह स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर के एक पुराने प्राइवेट एलबम का गाना बजने लगा। हालांकि इस गीत के बोल भी ‘वंदे मातरम्Ó ही थे, लेकिन यह वह वास्तविक स्वरूप नहीं था जिसे सरकारी आयोजनों में बजाया जाना अनिवार्य है।
4 मिनट तक खामोश रहा पूरा पंडाल, शिंदे ने दी सख्त हिदायत
गलत गीत बजने के बावजूद सम्मान की खातिर पूरी सभा और मंच पर मौजूद तमाम नेता करीब चार मिनट तक शांति से खड़े रहे। डिप्टी सीएम शिंदे के हाव-भाव से साफ झलक रहा था कि उन्हें भी इस चूक का तुरंत अहसास हो गया था। गाना खत्म होने के बाद जब शिंदे ने लोगों को संबोधित करना शुरू किया, तो उन्होंने सबसे पहले इस गलती के लिए खुले मंच से खेद जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि भविष्य में राष्ट्रगीत या देशभक्ति से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में ऐसी लापरवाही बिल्कुल नहीं होनी चाहिए और विशेष सावधानी बरती जाए। यह वाकया ऐसे वक्त में हुआ है, जब देश में वंदे मातरम् को लेकर पहले से ही सियासी बयानबाजी का दौर तेज है।
ठाणे से रहा है शिंदे का पुराना सियासी दबदबा
गौरतलब है कि ठाणे से एकनाथ शिंदे का बेहद मजबूत और पुराना राजनीतिक रिश्ता रहा है। उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरुआत यहीं से की थी और 2024 का विधानसभा चुनाव भी उन्होंने ठाणे की कोपरी-पांचपाखाड़ी सीट से ही जीता है। वह साल 2009 से लगातार इस सीट से विधायक चुने जा रहे हैं। इससे पहले वह 2004 से 2009 तक ठाणे विधानसभा सीट से विधायक रहे। मालूम हो कि साल 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से बगावत कर शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे। वहीं, हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की जीत के बाद ज्यादा सीटें होने के कारण भाजपा के पास सीएम पद गया और एकनाथ शिंदे ने डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी संभाली है।
00
(नई दिल्ली)चुनाव में गलत हथकंडे अपनाने वाले उम्मीदवारों पर एससी का चाबुक, सत्ता बदलते ही केस वापस लेने के खेल पर लगी रोक!
नई दिल्ली ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। भारतीय चुनावी राजनीति में काले धन और अनुचित साधनों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा फैसला सुनाया है। अक्सर देखा जाता है कि चुनाव के दौरान गड़बड़ी या काले धन के इस्तेमाल के आरोपी नेताओं पर सरकार बदलते ही राजनीतिक रसूख के चलते दर्ज मुकदमे वापस ले लिए जाते हैं। इस मनमानी पर कड़ा प्रहार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अब चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने के लिए संबंधित उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सांसदों-विधायकों की तरह उम्मीदवारों पर भी लागू होगा नियम
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े पुराने नियम का हवाला देते हुए यह बड़ा आदेश दिया। पीठ ने कहा कि जिस तरह मौजूदा सांसदों और विधायकों के मुकदमे केवल हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद ही वापस हो सकते हैं, ठीक वही नियम अब चुनाव लड़ने वाले सामान्य उम्मीदवारों पर भी समान रूप से लागू होगा। अदालत ने टिप्पणी की कि यह कदम चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता लाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इससे संभावित उम्मीदवारों को कड़ा संदेश जाएगा कि गलत काम करके कोई भी नेता सिर्फ सत्ता परिवर्तन के दम पर बच नहीं सकता।
राजनीतिक लाभ के लिए केस वापस लेना न्याय प्रणाली के खिलाफ
अदालत ने राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद मुकदमों को वापस लेने की परिपाटी पर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि राजनीतिक बदलाव के बाद अक्सर ऐसे अनुचित फैसले लिए जाते हैं, जो निष्पक्ष आपराधिक न्याय प्रणाली की मूल भावना के पूरी तरह खिलाफ हैं। अदालत ने जोर देकर कहा कि एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र अपने प्रतिनिधियों से नैतिक ईमानदारी और निष्पक्षता की पूरी उम्मीद रखता है। लोकतंत्र, कानून का शासन और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं और इनमें से किसी से भी समझौता व्यवस्था को कमजोर करता है।
10 लाख से ज्यादा कैश मिलने पर इनकम टैक्स का शिकंजा, 1 साल में जांच पूरी करने का निर्देश
काले धन के बेलगाम इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि चुनाव के दौरान चेकिंग में यदि स्टैटिक सर्विलांस टीम को 10 लाख रुपये से अधिक की नकदी मिलती है, तो तुरंत इनकम टैक्स विभाग को सक्रिय कर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, अदालत ने जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि केस दर्ज होने की तारीख से एक साल के भीतर जांच हर हाल में पूरी की जाए, ताकि चुनावी भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं को समय पर सजा दिलाई जा सके।
00
(भिंड)दर्दनाक हादसा : भिंड-ग्वालियर हाईवे पर पिकअप-डंपर की टक्कर, 8 मजदूरों की मौत, 25 घायल
भिंड ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। : मध्य प्रदेश के भिंड जिले में नेशनल हाईवे-719 पर सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात भीषण सड़क हादसा हो गया। गोहद के छीमका गांव के पास तेज रफ्तार पिकअप सामने से आ रहे डंपर से टकरा गई। हादसे में पिकअप सवार आठ मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर के ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।
हादसा रात करीब एक बजे हुआ। पुलिस के मुताबिक, पिकअप की रफ्तार करीब 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा होने का अनुमान है। छीमका गांव के पास हाईवे पर कुछ गायें सड़क पर बैठी थीं। अचानक सामने आए मवेशियों को बचाने के प्रयास में चालक ने पिकअप को मोड़ दिया। इसी दौरान सामने से आ रहे डंपर से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। भिड़ंत इतनी भीषण थी कि पिकअप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। गोहद चौराहा थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को क्षतिग्रस्त पिकअप से बाहर निकाला। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। गोहद चौराहा थाना प्रभारी रामनरेश यादव के अनुसार, हादसे में आठ मजदूरों की मौत हुई है, जबकि 25 लोग घायल हैं। मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए गए हैं। पुलिस मृतकों और घायलों की पहचान करने में जुटी है।
बताया जा रहा है कि सभी मजदूर ग्वालियर क्षेत्र में धान की रोपाई का काम करने आए थे। काम पूरा होने के बाद वे पिकअप से अपने गांव लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश लौट रहे थे। रात के सफर के दौरान छीमका गांव के पास यह दर्दनाक हादसा हो गया।
मवेशियों को बचाने के दौरान हुआ हादसा
पुलिस की शुरुआती जांच में सड़क पर बैठे मवेशियों को बचाने की कोशिश को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है। रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशी आने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, पुलिस हादसे की अन्य परिस्थितियों की भी जांच कर रही है।
हादसे के बाद कुछ समय तक एनएच-719 पर यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात सामान्य कराया।
फोरलेन की मांग के बावजूद नहीं शुरू हुआ काम
एनएच-719 पर लगातार हो रहे हादसों के बीच एक बार फिर इस सड़क को फोरलेन बनाने की मांग तेज हो गई है। दंदरौआ धाम के संत समाज से लेकर स्थानीय युवाओं तक ने फोरलेन की मांग को लेकर कई आंदोलन, चक्काजाम और ज्ञापन दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई की बैठकों में फोरलेन को मंजूरी देने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के दावे भी किए गए, लेकिन अब तक धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
भिंड से ग्वालियर और उत्तर प्रदेश के इटावा को जोड़ने वाला करीब 117 किलोमीटर लंबा एनएच-719 अभी भी टू-लेन है। बिना डिवाइडर वाली इस सड़क पर दिन-रात भारी डंपरों और बालू-रेत से लदे ओवरलोड वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति, भारी वाहनों की आवाजाही और मवेशियों की मौजूदगी के कारण हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन और डिवाइडर का काम जल्द शुरू नहीं हुआ तो इस सड़क पर ऐसे हादसों का सिलसिला जारी रह सकता है।
00
(नई दिल्ली)ई 20 पेट्रोल के खिलाफ जंतर-मंतर पर होगा बड़ा प्रदर्शन, तहसीन पूनावाला ने किया भूख हड़ताल का ऐलान
नई दिल्ली ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। देश में ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस अब सड़कों पर भी तेज होती नजर आ रही है। ई20 के खिलाफ आवाज उठा रहे तहसीन पूनावाला ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इसकी जानकारी दी। उनके मुताबिक, टीम भारत की ओर से 22 और 23 अगस्त को जंतर-मंतर पर ‘जनता दरबारÓ आयोजित किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गई है।
पूनावाला के अनुसार, 22 अगस्त को सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन शुरू होगा, जो आगे भी जारी रहेगा। इसके बाद 23 अगस्त को सुबह 11 बजे से प्रदर्शन के साथ भूख हड़ताल की जाएगी। उन्होंने दावा किया है कि दोनों दिन 5,000 से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं और प्रदर्शनकारियों की संख्या 10,000 तक पहुंचने की संभावना है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में ई10 पेट्रोल को लेकर स्पष्ट व्यवस्था करना शामिल है। पूनावाला का कहना है कि पुराने ऐसे वाहनों, जिन्हें ई20 ईंधन के अनुरूप तैयार नहीं किया गया है, उनके लिए ई10 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका दावा है कि पुराने वाहनों में ई20 के इस्तेमाल से माइलेज में कमी आने के साथ-साथ कुछ वाहन कंपोनेंट पर भी असर पड़ सकता है।
पूनावाला ने ई0 पेट्रोल की कीमत कम करने की भी मांग की है। इसके अलावा ई20 से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई है। उनका कहना है कि ईंधन नीति से जुड़े दस्तावेज आम लोगों के सामने आने चाहिए, ताकि ई20 को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
ई20 विरोधी प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पद से हटाने की मांग भी शामिल है। पूनावाला की ओर से जारी मांगों में इसे स्पष्ट तौर पर शामिल किया गया है। उन्होंने अपने संदेश के अंत में ‘चॉइस नहीं तो वोट नहींÓ का नारा भी दिया है। इससे संकेत मिलता है कि ई20 को लेकर लोगों को विकल्प नहीं मिलने की स्थिति में इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की जा सकती है।
00
(मुंबई)1.48 लाख रुपए की चोरी के मामले में अभिनेत्री रूपा दत्ता को मिली जमानत, 50 हजार के निजी मुचलके पर कोर्ट ने किया रिहा
मुंबई ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। अभिनेत्री रूपा दत्ता को मुंबई के कोलाबा में कथित 1.48 लाख रुपए की चोरी के मामले में बड़ी राहत मिली है। मामले में गिरफ्तार बंगाली अभिनेत्री को मुंबई की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी। साथ ही कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं। रूपा दत्ता को निर्देश दिया गया है कि वह मामले से जुड़े सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेंगी और अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकेंगी।
मामला मरीन ड्राइव की रहने वाली डिंपल सिंघवी की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, 12 जुलाई 2026 को वह बाबुलनाथ मंदिर से कोलाबा की तरफ जा रही थीं। इस दौरान रास्ते में काफी भीड़ थी। इसी भीड़भाड़ वाले इलाके के बीच उनका पर्स चोरी हो गया।
शिकायत में बताया गया कि पर्स में काफी कीमती सामान मौजूद था। इसमें करीब 1.20 लाख रुपए कीमत का डायमंड जड़ित सोने का ब्रेसलेट, 10 हजार रुपए नकद और करीब 15 हजार रुपए कीमत के एप्पल एयरपॉड्स शामिल थे। इसके अलावा पर्स में वॉलेट और कुछ जरूरी निजी दस्तावेज भी रखे हुए थे। कुल मिलाकर चोरी हुए सामान की कीमत करीब 1.48 लाख रुपए बताई गई है। पर्स गायब होने के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया और कोलाबा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस के मुताबिक, फुटेज में रूपा दत्ता कथित तौर पर शिकायतकर्ता का पीछा करती हुई नजर आईं। इसी आधार पर पुलिस ने अभिनेत्री को मामले से जोड़ते हुए उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस ने दावा किया कि रूपा दत्ता के कब्जे से चोरी की गई कुछ संपत्ति बरामद हुई है। हालांकि, मामले में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
जमानत की सुनवाई के दौरान रूपा दत्ता की ओर से उनके वकील सुनील पांडे ने अदालत में अभिनेत्री का पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि रूपा दत्ता को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और वह परिस्थितियों की शिकार हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभिनेत्री को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला किया। साथ ही सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने और अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने की शर्त रखी।
रूपा दत्ता का नाम इससे पहले भी चोरी के एक मामले में सामने आ चुका है। साल 2022 में कोलकाता पुस्तक मेले के दौरान कथित तौर पर पॉकेटमारी के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उस मामले में पुलिस ने उनके पास से कई वॉलेट और 75 हजार रुपए नकद बरामद किए जाने का दावा किया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि वह भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोगों का ध्यान भटकाकर चोरी करने की कोशिश कर रही थीं। उस मामले की जांच के दौरान उनके बयानों में कथित तौर पर विरोधाभास मिलने की बात भी सामने आई थी।
रूपा दत्ता के करियर की बात करें तो वह बंगाली और हिंदी मनोरंजन जगत में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कई फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है। वह ‘साथीÓ जैसी फिल्मों और धार्मिक टीवी शो ‘जय मां वैष्णोदेवीÓ में भी नजर आ चुकी हैं। अभिनय के अलावा वह खुद को निर्देशक, लेखक और सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर भी पेश करती रही हैं।
अभिनेत्री का नाम साल 2020 में फिल्मकार अनुराग कश्यप से जुड़े एक विवाद में भी सामने आया था। रूपा ने उस समय अनुराग कश्यप पर फेसबुक के जरिए आपत्तिजनक मैसेज भेजने का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में यह सामने आया कि जिस व्यक्ति से वह बातचीत कर रही थीं, उसका नाम भी अनुराग था और वह फिल्मकार अनुराग कश्यप नहीं थे। इस मामले को लेकर रूपा ने सोशल मीडिया पर बातचीत के स्क्रीनशॉट भी साझा किए थे।
00
(नई दिल्ली)दिल्ली के बीचों-बीच तालिबान का ‘विक्ट्री डेÓ जश्न, भारतीय अधिकारी भी पहुंचे; अफगान दूत ने भारत से कर दी ये बड़ी मांग
नई दिल्ली ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को पांच साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर देश की राजधानी दिल्ली में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी शायद कूटनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हो रही है। दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में पहली बार तालिबान की सत्ता में वापसी का जश्न ‘विक्ट्री डेÓ (विजय दिवस) के रूप में मनाया गया। इस कार्यक्रम में न सिर्फ तालिबान की नई नीतियों का बखान हुआ, बल्कि भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी ने भी सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस खास मौके पर अफगान दूत ने भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए भारत से एक अहम मांग कर दी है।
भारत के साथ संबंधों पर अफगान दूत का बड़ा बयान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में अफगानिस्तान के प्रभारी राजदूत नूर अहमद नूर ने कहा कि काबुल और नई दिल्ली के बीच मजबूत राजनीतिक भरोसा और आर्थिक साझेदारी समय की मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच संबंधों की निरंतरता से न केवल भारत और अफगानिस्तान को सीधा फायदा होगा, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता और साझा समृद्धि को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। नूर ने अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार की विदेश नीति का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी नीति किसी के भी आंतरिक मामलों में दखल न देने और एक ‘संतुलित जुड़ावÓ पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि उनकी सरकार भारत के साथ गहरे और प्रगाढ़ आर्थिक संबंध स्थापित करना चाहती है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी की मौजूदगी ने खींचा ध्यान
इस आयोजन की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इसमें भारत सरकार की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधित्व देखने को मिला। विदेश मंत्रालय के पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान-ईरान (पीएआई) संभाग के प्रमुख और संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। गौरतलब है कि भारत ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है, फिर भी भारतीय अधिकारी का वहां मौजूद होना अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। अफगान दूत ने बताया कि पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच न सिर्फ राजनयिक संपर्क बढ़े हैं, बल्कि दूतावास भी ज्यादा सक्रिय हुए हैं और उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने एक-दूसरे की राजधानियों का दौरा भी किया है।
साझा इतिहास की याद दिलाकर भारत से मांगा खुला समर्थन
दोनों देशों के बीच पुराने और ऐतिहासिक रिश्तों का हवाला देते हुए नूर ने कहा कि काबुल, हेरात और कंधार जैसे प्राचीन अफगान शहरों ने हमेशा भारतीय व्यापारियों और कारवां का खुले दिल से स्वागत किया है। वहीं, दिल्ली और लाहौर जैसे भारतीय शहरों को भी अफगान विद्वानों, कवियों और सूफियों के विचारों से काफी लाभ मिला है। राजनीतिक मोर्चे पर भी दोनों देशों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ आजादी के संघर्ष में एक-दूसरे को काफी प्रेरित किया है। इसी साझा और गौरवशाली अतीत का वास्ता देते हुए अफगान दूत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अफगानिस्तान के अधिकारों की रक्षा और सम्मान के लिए भारत से खुले समर्थन की अपील की है।
00
(मेरठ)आईएसआई के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़, आतंकी मोहम्मद जफर गिरफ्तार; 14 राज्यों से दबोचे गए 200 से अधिक ऑपरेटिव्स
मेरठ ,18 अगस्त ,(आरएनएस)। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और खूंखार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। यूपी एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक अहम आतंकी मोहम्मद जफर को गिरफ्तार कर उसके खतरनाक मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘एक्सÓ पर पोस्ट कर मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंसÓ नीति की सराहना की और सुरक्षाबलों के इस सफल ऑपरेशन की जानकारी दी।
14 राज्यों में ऑपरेशन, 200 से ज्यादा ऑपरेटिव्स गिरफ्तार
गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने आईएसआई का सहयोग करने वाले पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि भारतीय सुरक्षाबलों ने 14 राज्यों में एक साथ सघन अभियान चलाते हुए 200 से अधिक स्लीपर सेल और ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया है, जिससे देश पर होने वाले खतरनाक हमलों की साजिश नाकाम हो गई। अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) में अब तक शहजाद भट्टी और सरफराज डोगरा के गिरोह से जुड़े 16 संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा जा चुका है, जिनका सीधा कनेक्शन मेरठ और आसपास के जिलों से पाया गया है।
वेस्ट यूपी बना आतंकियों का नया ठिकाना? हापुड़ से लेकर सहारनपुर तक फैली थी जड़ें
मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश पाकिस्तानी गैंगस्टरों और आतंकी संगठनों के निशाने पर है। पिछले सात महीनों में एटीएस और सिविल पुलिस ने हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से कुल 16 संदिग्ध आतंकियों को दबोचा है। चौंकाने वाली बात यह है कि उमर, आजाद राजपूत और तुषार चौहान जैसे कई स्थानीय युवक इन आतंकियों के झांसे में आकर उनके लिए काम कर रहे थे। यहां तक कि तुषार चौहान ने तो अपना धर्म बदलकर मुस्लिम नाम भी रख लिया था। एटीएस को शक है कि जफर की गिरफ्तारी के बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है और कई अन्य युवक इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।
मदरसे से जुड़ा कनेक्शन, चंदा वसूल कर जैश को भेजता था जफर
जांच में यह बात सामने आई है कि आतंकी मोहम्मद जफर का सीधा कनेक्शन बुलंदशहर के एक मदरसे से है। इसी मदरसे के एक परिचित ने साल 2017 में जफर को पढ़ाई के नाम पर मेरठ बुलाया था। एटीएस ने जफर को दो दिन पहले हापुड़ के शेरपुर स्थित एक मस्जिद से पकड़ा था, लेकिन पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया था। हालांकि, जांच एजेंसी ने उसके सभी उर्दू दस्तावेज जब्त कर लिए थे। जब उर्दू अनुवादक से इन दस्तावेजों को पढ़वाया गया, तो जफर की असलियत सामने आई। वह जैश-ए-मोहम्मद के लिए बाकायदा चंदा इक_ा कर संगठन को भेज रहा था, जिसके बाद एटीएस ने उसे दोबारा दबोच लिया।
पाकिस्तान जाने की थी तैयारी, मसूद अजहर से मीटिंग फिक्स!
बिहार का मूल निवासी मो

