वाद-विवाद प्रतियोगिता में वाकपटुता व तर्कशक्ति का हुआ प्रदर्शन
-जूनियर संवर्ग में गुलमोहर व सीनियर संवर्ग में अमलतास सदन हुआ विजयी
अयोध्या। गुरूवार को यश प्रांगण में एक बार पुनः सभी बच्चों ने अपनी वाणी को हथियार बनाते हुए अपने विचारों को एक दूसरे के साथ साझा कर अपनी वाद- विवाद प्रतियोगिता को बहुत ही रोचक ढंग से विद्यालय मंच के माध्यम से सभी के समक्ष साझा किया। हमारे विद्यालय के बुद्धिमान विद्यार्थियों ने तर्क शक्ति और आत्मविश्वास की औपचारिकता के साथ अपने विषय से जोड़ते हुए अपनी जानकारी को साझा किया। यह वाद-विवाद प्रतियोगिता हमें सक्रिय रूप से सोचने समझने और अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती है, साथ ही साथ हमें हमारी तर्कशक्ति को और भी सुधारात्मक निर्णय शक्ति को विकसित करता हैद्य जिससे हमारा आत्मविश्वास और भी बढ़ता है हम यह भी कह सकते हैं कि इस तरह की प्रतियोगिता से बच्चों में आलोचनात्मक सोच के विकास के साथ-साथ उस विषय पर अपनी प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति भी देने का सुअवसर मिलता है। वाद-विवाद या बहस किसी विषय पर चर्चा की एक औपचारिक विधि है। वाद-विवाद में दो परस्पर विपरीत विचारों के समर्थक अपना- अपना तर्क रखते हैं और दूसरे के कथनो का खंडन करने का प्रयत्न करते है। वाद-विवाद सार्वजनिक बैठको में हो सकता है शैक्षणिक संस्थानों मे हो सकता है, विदयालयी सभाओं मे हो सकता है यह बहुत ही प्राचीन विधि है इसे शास्त्रार्थ भी कहते है इससे विद्यार्थियों मे तार्किकता का विकास होता है इसी बात को ध्यान मे रखते हुए हमारे विद्यालय मे हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में उदघोषक के रूप में विद्यालय की छात्रा अनुष्का वर्मा, अंजली मौर्या, अंशिका यादव, ने उद्घोषणा समूह प्रभारी अंकित त्रिपाठी मैम के संरक्षण में कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में जूनियर संवर्ग का शीर्षक चौट जीपीटी होमवर्क का साथी या नकल का माध्यम तथा सीनियर संवर्ग का शीर्षक- सूचना क्रांति ज्ञान का विस्तार या भ्रम का जाल” रहा। निर्णायक मंडल के रूप में आशा भगवान बक्स पी. जी. कॉलेज से राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता डा. निरुपमा श्रीवास्तव , वाईपीआईटीआई से योगेन्द्र सिंह एवं विद्यालय से पुस्तकालय अध्यक्ष कालेंद्र पांडे उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी सदन के बच्चों ने बढ़ चढ़कर अपनी जानकारियों को पक्ष तथा विपक्ष दोनों तर्क में साझा किया। यह कार्यक्रम विद्यालय प्रधानाचार्य सरिता त्रिपाठी व सीनियर कोऑर्डिनेटर गिरीश चंद्र वैश्य व जूनियर कोऑर्डिनेटर प्रसून श्रीवास्तव और प्राइमरी कोऑर्डिनेटर वंदना पांडे के साथ विद्यालय प्रांगण में सभी शिक्षक व सहायक वर्ग भी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में जूनियर संवर्ग में गुलमोहर सदन तथा सीनियर संवर्ग में अमलतास सदन विजयी हुआ।
युवक पर हमला करने के मामले में आरोपित ने किया कोर्ट में सरेण्डर, मिली राहत
-पुरानी रंजिश के चलते हुआ था युवक लकी पर प्राणघातक हमला, मिली जमानत
अयोध्या। रौनाही थाना क्षेत्र में स्थित मनोज किराना स्टोर पर सामान लेने गये लकी पर पुरानी रंजिश को लेकर प्राणघातक हमला करने एवं हाथ तोड़ने के मामले में आरोपित मो. शाहिद ने विशेष न्यायालय एस0सी0/एस0टी0एक्ट की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। विशेष न्यायाधीश (एस0सी0/एस0टी0 एक्ट) दीपक यादव ने अदालत में प्रस्तुत आरोपित मो0 शाहिद के जमानत प्रार्थना पत्र सुनवाई के पश्चात तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुये मंजूर करने का आदेश पारित किया है। इसके पहले आरोपित अंतरिम जमानत पर था। मामला रौनाही थानान्तर्गत मंगलसी गांव का गत 6 मार्च का है। इसके पहले आरोपित मो0 शाहिद के पक्ष से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता शावेज जाफरी व सृजन श्रीवास्तव ने पैरवी किया तर्क दिया कि आरोपित निर्दाेष है रंजिशन नामित किया गया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में दर्शाये गये तथ्य एवं लगाये गये आरोप सर्वथा गलत एवं निराधार हैं। उसने ऐसा कोई भी कृत्य नहीं किया है। आरोपित व उसके परिजनों के साथ पूर्व से चली आ रही रंजिश के कारण हैरान व परेशान करने की नीयत से झूठे तथ्यों के आधार पर गलत प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित करायी गयी है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उसके विरूद्ध स्वतन्त्र एवं विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 मार्च 2026 को 8 बजे दिन में वादिनी मंजू पत्नी वंशराज ग्राम मंगलसी थाना रौनाही का पुत्र लकी मनोज किराना स्टोर पर सामान लेने के लिए गया था। उसी समय गांव के साहिल पुत्र माजिद अपने साथियों के साथ वादिनी के लड़के पर प्राण घातक हमला कर दिया। उसके बाद उसे फर्श पर उठाकर पटक दिया। इसके बाद उसे लात घूसा से मारा इस हमले में वादी के लड़के लकी का हाथ टूट गया। यह मुकदमा मंजू की तहरीर पर थाना रौनाही में मो0 शाहिद व एक अज्ञात हमलावर के विरूद्ध अपराध सं0-89/2026 अन्तर्गत धारा 115(2), 117(2), 352 बीएनएस व धारा 3(2) एस0एसी0/एस0टी0 एक्ट के तहत दर्ज हुई।

