करवा चौथ के लिए सामानों की खरीदारी तेज
जौनपुर। हिंदू धर्म में करवा चौथ के व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। सभी सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास करती हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। इस व्रत को न सिर्फ एक अकाम पूजा की तरह मनाया जाता है बल्कि ये पति-पत्नी के विश्वास और समर्पण को भी दिखाता है। इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन की पूजा में कई सामग्रियों का इस्तेमाल होता है और इस दिन के लिए कुछ चीजों को खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर इस दिन कुछ विशेष सामग्रियां खरीदी जाती हैं और पूजा में इनका प्रयोग किया जाता है, तो ये सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती नहीं। बाजारों में इसको लेकर खरीददारी तेज हो गयी है।करवा चौथ के दिन सबसे शुभ होताहै सोलह श्रृंगार खरीदना और उसका इस्तेमाल करना। इस दिन महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार करना जरूरी होता है, इससे उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। अगर आप सोलह श्रृंगार की सभी सामग्रियां न भी खरीद पाएं, तो इस दिन नई बिछिया जरूर खरीदें और पहनें। नई बिछिया पहनने से पूजा का पूर्ण फल और करवा माता का आशीर्वाद बना रहता है। इसके अलावा सोलह श्रृंगार में चूड़ी, बिंदी, पायल, सिंदूर, मेहंदी समेत अन्य सामग्रियां भी जरूर खरीदें।करवा चौथ की पूजा के लिए आपको चौकी पर बिछाने के लिए हम लाल या पीला वस्त्र खरीदना चाहिए, इसके अलावा आप करवा माता की तस्वीर या कैलेंडर खरीदें। करवा माता के लिए लाल चुनरी या लाल वस्त्र खरीदें। लाल रंग को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और यदि आप इस रंग के वस्त्र खरीदेंगे तो पूजा का पूर्ण फल मिलता है। करवा चौथ माता की पूजा करने के लिए रोली, अक्षत और चंदन खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन करवा माता और गौर में सिंदूर अर्पित किया जाता है और गौर से सुहाग लिया जाता है। इससे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा के लिए एक चांदी का सिक्का खरीदना शुभ होता है। यदि सिक्का न भी ले पाएं, तो नई बिछिया को पहले चंद्रमा को अर्पित करें फिर उसी बिछिया को धारण करें और करवा चौथ की पूजा में इसी बिछिया को धारण करें। पीतल या चांदी का करवा पहले से ही रखा है, तो आप इस दिन सिर्फ मिट्टी का एक नया करवा खरीदें। इसके साथ ही, आप चांद को देखने के लिए एक छलनी खरीदें। इसकी खरीदारी भी अत्यंत शुभ मनाई जाती है। आपको कभी भी पुरानी छलनी से चांद को नहीं देखना चाहिए।

