खप्पर-मुंडमाला धारण कर कर रौद्र रूप में निकलीं मां काली
200 साल पुरानी दारागंज में स्वांग की परंपरा
प्रयागराज। दारागंज में मां काली के रौद्र स्वरूप के दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और भुजाली लिए मां काली के रूप में कलाकार सड़कों पर निकले तो लोग उन्हें देखने के लिए ठहर गए। ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों के बीच कलाकार ने पारंपरिक नृत्य किया। इस दौरान सड़क किनारे खड़े श्रद्धालु दर्शन करते रहे।
दारागंज का काली स्वांग सैकड़ों वर्ष पुरानी धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इसमें कलाकार मां भगवती के काली स्वरूप को धारण कर नृत्य और अभिनय के जरिए पौराणिक प्रसंगों को जीवंत करते हैं। श्रद्धालु इसे सांस्कृतिक आयोजन के साथ मां के दर्शन और आशीर्वाद पाने का अवसर भी मानते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, काली स्वांग के दौरान मां काली अपने भक्तों को दर्शन देने निकलती हैं। इसी आस्था के चलते लोग देर रात तक आयोजन का इंतजार करते हैं। श्रद्धालु सड़क किनारे खड़े होकर मां के दर्शन करते हैं और जयकारे लगाते हैं। काली स्वांग में कलाकार की वेशभूषा और हाव-भाव सबसे खास होते हैं। हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और भुजाली लेकर कलाकार मां के रौद्र स्वरूप को मंच से बाहर सड़कों पर साकार करता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर होने वाला पारंपरिक नृत्य माहौल को भक्तिमय बना देता है।

