“टूटते रिश्तों को जोड़ने व मिशन शक्ति अभियान के तहत जागरुक करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही महिला थानाध्यक्ष आशा शुक्ला”

“टूटते रिश्तों को जोड़ने व मिशन शक्ति अभियान के तहत जागरुक करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही महिला थानाध्यक्ष आशा शुक्ला”

अयोध्या।पुलिस की भूमिका केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है,बल्कि समाज में विश्वास, सुरक्षा और पारिवारिक सौहार्द स्थापित करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।इसी दायित्व का निर्वहन करते हुए #तेज तर्रार व अनुभवी महिला थानाध्यक्ष आशा शुक्ला ने अपनी संवेदनशील कार्यशैली,धैर्य और सूझबूझ के बल पर दर्जनों बिखरते परिवारों को फिर से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही है।उनके कार्यशैली की तारीफ रविवार को दूर दूर से अपनी फरियाद लेकर आने वाली महिलाओ तथा परिजनों ने किया।देखा जाये प्रतिदिन दूर से आने वाले न्याय की आस लिये महिला थाना पहुंचने वाले पति-पत्नी के विवादों में उन्होंने केवल कानूनी प्रक्रिया तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि दोनों पक्षों को अपने सूझबूझ से समझाकर व उनकी समस्याओं को सुनकर और आपसी संवाद स्थापित कर अनेक परिवारों को टूटने से बचाने का काम कर रही है।देखा जाये तो उनके प्रयासों से कई घरों में फिर से खुशियां लौटी हैं और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हुआ है।वही एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के अलावा मिशन शक्ति अभियान के नोडल प्रभारी व एसपी ग्रामीण (आईपीएस) बलवंत चौधरी तथा एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी के निर्देश पर अयोध्या पुलिस द्वारा चलाए जा रहे महिला सुरक्षा व जन जागरुकता अभियानों को धरातल पर सफल बनाने में महिला थानाध्यक्ष आशा शुक्ला की भी महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई दे रही है।मिशन शक्ति अभियान के तहत वे अपनी टीम के साथ महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा हेल्पलाइन सेवाओं के प्रति जागरूक करने में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान कर रही है।वही राम नगरी मे आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों, मेलों, धार्मिक आयोजनों एवं विशेष अभियानों में भी उनकी सक्रिय भूमिका निभा रही है।बताते चले कि रामनगरी अयोध्या में आयोजित बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान महिला सुरक्षा, शिकायत निस्तारण और जनसंपर्क के क्षेत्र में उनकी कार्यशैली को व्यापक सराहना मिली है।इस संबंध मे महिला थानाध्यक्ष आशा शुक्ला का मानना है कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का संबंध जितना मजबूत होगा,समाज उतना ही सुरक्षित और सशक्त बनेगा।यही कारण है कि उनके पास पहुंचने वाली महिलाओं को केवल कानूनी सहायता ही नहीं, बल्कि भावनात्मक संबल और न्याय का भरोसा भी मिलता है।

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