देश में विभिन्न प्रकार के लगभग साढे 5 .50करोड़ मुकदमे लंबित:राष्ट्रीय स्तर पर 3.27 लाख में वकील नहीं हुए पेश

देश में विभिन्न प्रकार के लगभग साढे 5 .50करोड़ मुकदमे लंबित:राष्ट्रीय स्तर पर 3.27 लाख में वकील नहीं हुए पेश

 

 

( श्रोत -सूचना विभाग अयोध्या)

 

देश में विभिन्न प्रकार के लगभग साढे 5 .50करोड़ मुकदमे लंबित हैं तथा राष्ट्रीय स्तर पर 3.27 लाख में वकील पेश नहीं हुए तथा

2.22 में किन्ही कारण से स्टे है और 25000 से ज्यादा भगोड़े अपराधी

21000 से ज्यादा मामलों में दस्तावेजों का इंतजार है

और 927 आर्थिक अपराधी जो विशेष रूप से भगोड़े

यह नेशनल ज्यूडिशल ग्रेड सिस्टम पर सूचनाओं उपलब्ध है

उत्तर प्रदेश में राजस्व संहिता के अंतर्गत लगभग 10 लाख से ज्यादा मुकदमे लंबित है

संहिता के लागू हुए 14वर्ष हो चुके हैं तथा

नियमावली के लागू हुई लगभग 10वर्ष पूरे हो चुके हैं

राजस्व के लगभग 25-25 साल पुराने बाद जो जमींदारी विनाश उन्मूलन एन उन्मूलन अधिनियम 1952 धारा 333 तथा

वर्तमान राजस्व संहिता की धारा 210 के तहत न्यायालय में सुनवाई के लिए पंजीकृत है

मुकदमों के राजस्व मुकदमों के निस्तारण में वादी प्रतिवादी का लिखित बहस ज्यादा कारगर होगा

राज्यों के सूचना अयोग उपभोक्ता फोरम आयोग

सेवा अधिकरण ट्रिब्यूनल रिटायर ऑफीसरों के

एक सुविधा केंद्र के रूप में डिवेलप हो रहे हैं

इसमें भी समय से

न्यायालयों में सुनवाई नहीं होती तथा इसमें भी 3 से 4 साल से पुराने बाद लंबित हैँ

 

(RCCMC) राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रमाण की कार्रवाई बहुत ही कारगर है

इसके आधार पर नियमित समीक्षा किया जाना चाहिए

ज्यादातर कोर्ट कोर्ट में नियमित बैठक नहीं होती

डॉ मुरलीधर सिंह शास्त्री

अधिवक्ता

मा उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लखनऊ

एवं

अध्यक्ष भारतीय ला रिपोर्टर संघ तथा भारत विधिक सेवा केंद्र लखनऊ

लखनऊ 25अक्टूबर 2026

 

 

इसका मुख्य कारण

समय से सुनवाई न होना

नियमित कोर्ट की बैठकों का ना होना तथा

सरकारी एवं प्रतिवादी पक्षों द्वारा लिखित बहस ना दिया जाना है

हमारे सरकार द्वारा RCCMS सिस्टम लागू किया गया है जो बहुत ही अच्छा है

कुछ राज्य सरकारों इसको अपना रही है जैसे बिहार आदि

इसमें नियमित समीक्षा की आवश्यकता है

क्योंकि यह मुख्यमंत्री जी के पहल पर लागू किया गया था

और नियमित कोर्ट की बैठकों की आवश्यकता एवं समीक्षा व भी जरूरी है है

इसी प्रकार सूचना आयोग की

एवं उत्तर प्रदेश प्रशासनिक एवं न्यायिक ट्रिब्यूनल राज्य उपभोक्ता फोरम के के कार्यों की समीक्षा की आवश्यकता है

वहां भी कोर्ट नियमित नहीं बैठती है

तथा कोर्ट में वादी प्रतिवादियों को लिखित बहस देकर मुकदमे का निस्तारण करना चाहिए

ऐसा माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के भी निर्देश हैं

उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक अध्ययन मेरे द्वारा किया गया है जिसमे

इसलिए सरकार को लिखित बहस से दिशा निर्देश जानी करना चाहिए

कम से कम सरकारी वकील तो या जो लगभग 2000 सरकारी वकील है वह तो ऐसा काम कर ही सकते हैं

कुछ सरकारी वकील अपने जगह पर दुसरे को खड़ा करते हैं मनानीय उच्च न्यायालय के सीसी फुटेज से सत्यपन किया जा सकता है

इससे मुकदमों के निस्तारण में तेजी होगी तथा

आम जन में शांति लाभ होगी

केस के अंतिम में

गुणात्मक ट्रायल के लिए नारको टेस्ट पॉलीग्राफ टेस्ट इन ब्रेन मैपिंग टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है

ऐसा माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी दिशा निर्देश दिया है

देश में लगभग 5:30 करोड़ मुकदमे लंबित है

यह जानकारी जानकारी विगत हुए संसद के सत्र में कानून मंत्री द्वारा दी गई है इसमें लगभग 90000 मामले सुप्रीम कोर्ट में है तथा माननीय उच्च न्यायालय में लगभग 62 लाख मामले लंबित है पूरे देश के 700 से ज्यादा जिला न्यायालय में लगभग 16 लाख से ज्यादा मामले ट्रायल में लंबित है जिसमें साढे 13 लाख से ज्यादा आपराधिक पृष्ठभूमि के और शेष दीवानी आदि हैं नेशनल लीगल अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार देश में न्यायालय का सबसे ज्यादा खर्च उत्तर प्रदेश बिहार पर मामलों के निस्तारण में किया जाता है

इसमें विधिक सेवा के अंतर्गत कार्य होते हैं और

लगभग उत्तर प्रदेश के संदर्भ में देखा जाए तो राजस्व न्यायालय के में लगभग 10 लाख से ज्यादा मामले लंबित है इसकी समीक्षा वर्तमान सरकार द्वारा स्थापित आरसीसीएमएस या राजस्व न्यायालय कंप्यूटर प्रबंधन प्रमाण के आधार पर की जाती है

उत्तर प्रदेश

राजस्व न्यायालय में लगभग 2333जो नायब तहसीलदार से लेकर 18 मंडल 75 जनपद और राजस्व परिषद के लखनऊ एवं प्रयागराज के कार्यालय को मिलाकर हैं

हमारे प्रदेश में राजस्व संहिता उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की अधिसूचना 12 दिसंबर 2012 को हुई थी जो लगभग 14 साल पूरे हो गए हैं तथा इस संबंध राजस्व संहिता नियमावली की अधिसूचना 27 मई 2016 को हुई थी इसके भी 10साल हो गए हैं

इसमें हमें उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान मध्य प्रदेश विशेष कर हिंदी भाषा भाषा राज्यों को अध्ययन करने पर प्रकाश में आया है कि ज्यादातर राजस्व न्यायालय की नियमित बैठकर नहीं होती इससे बादों का बहुत बड़ा बोझ बड़ा जा रहा है लगभग 10 से 12% तक बाद आते हैं

और

राजस्ववादों में से लगभग 40 से 50% तक वैसे होते है

जो निश्चित में 2 तारीख पर समाप्त हो सकते हैं

 

तथा मौके पर निरीक्षण करके समाप्त किया जा सकता है लेकिन

जब राजस्व न्यायालय बैठती नहीं और तारीख पर तारीख लगती है

इससे न्यायालय को बोझ बढ़ रहा है तथा आपसी विवाद भी बढ़ रहे हैं

इस संबंध में मेरा सरकार से निम्न सुझाव है

राजस्व बाद सुनने वालों को की नियमित कार्यों की समीक्षा किया जाए

और जो सरकारी पक्ष से संबंधित विभाग या सरकारी अधिवक्ता अपने पक्ष से तत्काल अपनी बात रखें

एवं लिखित रूप में रखें तथा बाद के जो अधिवक्ता हैं को लिखित रूप से बात रखें तो इसका निर्धारण जल्द से जल्द होगा

 

सरकार द्वारा योग्य अधिवक्ताओं को नियुक्त करना चाहिए

जिससे की जनता की संवेदनाओं को समझ सकें और

संबंधित पीठासीन अधिकारियों से समय से न्याय दिला सकें

जय हिंद जय भारत जय

अधिवक्ता समाज जय भारतीय संविधान

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