(देहरादून)देश में पहली बार, मदरसों के लिए नया पाठ्यक्रम हुआ तैयार; जल्द हो सकता है लागू
देहरादून ,30 अक्टूबर ,(आरएनएस)। उत्तराखंड सरकार ने मदरसों समेत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नया धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। कक्षा 1 से 8वीं तक का पाठ्यक्रम पहले ही तैयार किया जा चुका है और इसे इसी सप्ताह लागू करने की तैयारी है। वहीं, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए भी पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। जल्द ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इसका विमोचन कराने की योजना है।
नया पाठ्यक्रम लागू होने के बाद सभी संबंधित संस्थानों को निर्धारित सिलेबस के अनुसार ही धार्मिक शिक्षा देनी होगी। गौरतलब है कि राज्य में मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया था। इसके बाद मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदाय के शिक्षण संस्थानों के लिए पहली बार अलग धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
इसी सत्र से पढ़ाई, अगले सत्र में छपेंगी किताबें
सरकार की योजना के मुताबिक कक्षा 1 से 8वीं तक की अध्ययन सामग्री ऑनलाइन और ऑफलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इसी सामग्री के आधार पर विद्यार्थियों की परीक्षाएं भी आयोजित होंगी। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि, पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन अगले शैक्षणिक सत्र में बजट की व्यवस्था होने के बाद किया जाएगा। मौजूदा सत्र का आधे से अधिक समय बीत चुका है, इसलिए फिलहाल अध्ययन सामग्री के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी।
मान्यता नहीं लेने पर लगेगा 5 लाख रुपये तक जुर्माना
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नियमों के दायरे में लाने के लिए सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक सदन में पारित किया है। इसके प्रावधानों के तहत बिना मान्यता या नियमों का उल्लंघन कर धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित संस्थान को बंद करने और वहां रिसीवर नियुक्त करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकेगी।
पहले 452 मदरसे थे, अब 35 संस्थानों को मिली मान्यता
जानकारी के अनुसार, पहले उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड के तहत 452 मदरसे संचालित होते थे। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद अब तक 35 संस्थानों ने इससे मान्यता प्राप्त की है। बताया गया है कि आधे से अधिक मदरसे बंद हो चुके हैं। इसके अलावा करीब 80 संस्थानों ने शिक्षा विभाग से मान्यता ली है, जबकि 100 से अधिक संस्थानों ने विभाग में मान्यता के लिए आवेदन किया है।
धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों पर भी जोर
नए पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा के अलावा नैतिक मूल्य, स्वतंत्रता संग्राम की गाथा, डिजिटल व्यवहार, नशे से बचाव और आपसी भाईचारे जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को धार्मिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों से भी परिचित कराना है।
धामी बोले- गुणवत्तापूर्ण और एकसमान शिक्षा प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और एकसमान शिक्षा उपलब्ध कराना है। धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार हो चुका है और इसे जल्द लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मदरसों समेत सभी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।
वहीं, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम धर्मगुरुओं और शिक्षाविदों की अलग-अलग समितियों के माध्यम से तैयार किया गया है। इसके लिए शिक्षा विभाग से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

