मातृभूमि योजना के तहत बनेगा “श्री अंजनी पांडेय पुस्तकालय एवं वाचनालय

*मातृभूमि योजना के तहत बनेगा “श्री अंजनी पांडेय पुस्तकालय एवं वाचनालय”*

– प्रेमधर पट्टी गांव, रानीगंज विधानसभा, में पुस्तकालय के माध्यम से फैलेगा ज्ञान का प्रकाश

*प्रतापगढ़, 21 सितंबर, 2026:* ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतापगढ़ निवासी, पूर्व कमिश्नर और बेल्हा मेल फाउंडेशन के संस्थापक श्री अंजनी कुमार पांडेय अपने पैतृक गांव प्रेमधर पट्टी, रानीगंज विधानसभा में पुस्तकालय एवं वाचनालय का निर्माण करा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की मातृभूमि योजना के तहत ग्राम पंचायत प्रेमधर पट्टी, विकास खंड बाबाबेलखरनाथ धाम, रानीगंज विधानसभा, जनपद प्रतापगढ़ में यह पुस्तकालय तैयार किया जा रहा है। इसका नाम “श्री अंजनी पांडेय पुस्तकालय एवं वाचनालय” होगा।

पूर्व आईआरएस अधिकारी श्री अंजनी कुमार पांडेय ने कहा, “जिस गांव की मिट्टी ने हमें पहचान दी, वहां के बच्चों और युवाओं के भविष्य के लिए कुछ कर पाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इसी भावना के साथ अपने पैतृक गांव प्रेमधर पट्टी, रानीगंज विधानसभा में पुस्तकालय एवं वाचनालय की स्थापना का संकल्प लिया है।”

उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों और युवाओं को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। पुस्तकालय केवल किताबें रखने की जगह न होकर विद्यार्थियों के लिए पढ़ने, सीखने और आगे बढ़ने का साझा केंद्र बने, यही उनकी कोशिश है। खास तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को गांव में ही शांत और बेहतर अध्ययन का वातावरण मिल सके, इस दिशा में यह पुस्तकालय उपयोगी साबित होगा।

श्री अंजनी कुमार पांडेय 2010 बैच के आईआरएस (इंडियन रेवन्यू सर्विसेज़) अधिकारी रहे हैं। प्रतापगढ़ में जन्में और पले-बढ़े अंजनी पांडेय जी अपने गृहजनपद प्रतापगढ़ विशेषकर अपने गांव से बेहद लगाव रखते हैं। सामाजिक कार्यों विशेष रुप से चाइल्ड एजुकेशन को लेकर उनकी विशेष सक्रियता रहती है।

इस पुस्तकालय के निर्माण लागत राशि का 60 प्रतिशत योगदान श्री अंजनी कुमार पांडेय की ओर से जमा करा दिया गया है, जबकि शेष 40 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी।

मातृभूमि योजना के तहत किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या निजी संस्था द्वारा ग्राम पंचायत में विकास कार्य या अवस्थापना सुविधा के निर्माण में सहयोग किया जा सकता है। योजना के प्रावधानों के अनुसार परियोजना की लागत का 60 प्रतिशत सहयोगकर्ता द्वारा वहन किए जाने और शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है। सहयोगकर्ता की इच्छा के अनुसार परियोजना का नाम रखने और निर्धारित स्थान पर सहयोगकर्ता का नाम प्रदर्शित करने का भी प्रावधान है।

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