रोक दिया गया नाले का प्राकृतिक प्रवाह, इसीलिए सीएमपी में भरा पानी
सीएमपी आक्टा अध्यक्ष ने न्याय मित्र, उच्च न्यायालय को को लिखा पत्र, दिया सुझाव
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (ऑक्टा) के अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र पाल सिंह ने सीएमपी डिग्री कॉलेज में जलभराव के लिए प्रशासनिक भ्रष्टाचार और इंजीनियरिंग की गलत योजना को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस संबंध में न्याय मित्र, उच्च न्यायालय को पत्र भेजकर जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सुझाव दिए हैं।
प्रो. सिंह ने पत्र में कहा कि वह करीब 30 वर्षों से सीएमपी में अध्यापन कर रहे हैं और बारिश के पानी से कॉलेज के प्रभावित होने की समस्या को लंबे समय से देखते आ रहे हैं। कॉलेज के दक्षिणी हिस्से से स्वाभाविक ढाल के अनुरूप नाला मुख्य गेट की ओर से पूर्व और फिर उत्तर दिशा में बहता था। यह नाला बॉटनी विभाग के कोने से होकर आगे तरणताल की ओर जाता था। पहले तेज बारिश के बाद भी पानी एक दिन में स्वतः निकल जाता था। आरोप है कि इंजीनियरिंग की गलत योजना के कारण नाले के प्राकृतिक प्रवाह को रोक दिया गया।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि नाले की तलहटी और ऊपर के हिस्से को लगभग बराबर कर उसकी पानी वहन करने की क्षमता कम कर दी गई। इसके चलते बारिश का पानी नाले से निकलने के बजाय कैंपस में फैल जाता है। चारों तरफ नाला पाट दिए जाने से पानी बाहर नहीं निकल पाता और स्नातक, परास्नातक और शोध के करीब 10 हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई कई-कई दिन बाधित होती है।
ऑक्टा अध्यक्ष ने नगर निगम से बाढ़ का पानी सीएमपी में आने से रोकने, नाले की चौड़ाई बढ़ाने और नियमित सफाई कराने की मांग की है। साथ ही कॉलेज की पूर्वी सीमा के सहारे उत्तर दिशा में जाने वाले नाले के प्राकृतिक ढाल और प्रवाह को बहाल करने तथा कैंपस में भरे पानी को उत्तर दिशा में निकालने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है।

