*विदेशी शासनकाल में आयुर्वेद के संरक्षण के संकल्प से हुआ अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन का गठन*
*ब्यूरो रिपोर्ट-जनार्दन श्रीवास्तव*
*शाहजहांपुर* मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय स्थित इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी कार्यालय में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन की आवश्यक बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। बैठक में संगठन की सदस्यता अभियान को गति देने तथा भारत सरकार की मंशा के अनुरूप भारत की परंपरागत चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के संरक्षण, संवर्धन एवं जनस्वास्थ्य में उसकी अग्रणी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष डॉ विजय जौहरी ने कहा कि आयुर्वेद भारत की हजारों वर्ष पुरानी वैज्ञानिक एवं परंपरागत चिकित्सा पद्धति है, जिसने सदियों तक जनस्वास्थ्य की रक्षा की। उन्होंने कहा कि बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विदेशी शासनकाल के दौरान आयुर्वेद की शिक्षा, चिकित्सा एवं औषध निर्माण व्यवस्था उपेक्षित होती चली गई। आयुर्वेदिक शिक्षण संस्थानों, चिकित्सकों के पंजीकरण तथा औषध निर्माण की कोई एक समान व्यवस्था नहीं थी। ऐसी परिस्थितियों में देशभर के आयुर्वेदाचार्यों एवं वैद्यों ने यह अनुभव किया कि यदि आयुर्वेद को संगठित नहीं किया गया तो भारत की यह महान चिकित्सा परंपरा कमजोर होती जाएगी।
डॉ विजय जौहरी ने कहा कि वर्ष 1970 में संसद द्वारा भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद अधिनियम पारित किया गया, जिसके अंतर्गत सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन का गठन हुआ। इस ऐतिहासिक अधिनियम की पृष्ठभूमि तैयार करने और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे आयुर्वेद शिक्षा के राष्ट्रीय मानक निर्धारित हुए तथा चिकित्सकों के पंजीकरण एवं शिक्षा व्यवस्था को विधिक आधार प्राप्त हुआ। इन सतत प्रयासों के फलस्वरूप आज देश में बीएएमएस, एमडी, एमएस, पीएचडी सहित उच्च आयुर्वेद शिक्षा तथा अनुसंधान की सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित हो चुकी है।
डॉ विजय जौहरी ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन सदैव भारत सरकार एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य नीतियों का सहयोगी रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एवं आयुष विभाग द्वारा जनस्वास्थ्य संरक्षण के लिए संचालित सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, जन-जागरूकता अभियानों, रोग नियंत्रण कार्यक्रमों, टीकाकरण, आपदा राहत, स्वास्थ्य शिविरों तथा अन्य लोकहितकारी गतिविधियों में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के आयुर्वेदिक चिकित्सक सक्रिय एवं सहयोगी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने सभी चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे शासन-प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें तथा आयुर्वेद के माध्यम से स्वस्थ, निरोग एवं सशक्त भारत के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करें।
उक्त कार्यक्रम में विर्गो यू ए पी फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के राजीव शर्मा एवं आयुर्वेदिक स्टोर सिंह एजेंसी के प्रोप्राइटर सरदार सर्वजीत सिंह ने आयुर्वेदिक प्रचार सामग्री वितरित कर सभी का आभार प्रकट किया
इस अवसर पर डॉ एस पी कौशल डॉ मुकेश कुमार प्रभारी आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर डॉ हेमेंद्र वर्मा, डॉ आर पी सक्सेना, डॉ अविनाव श्रीवास्तव, डॉ सुमन अग्रवाल, डॉ पल्लवी सक्सेना, डॉ रचना रस्तोगी, डॉ सूफ़िया, डॉ रजत सक्सेना, डॉ अभिनव सक्सेना, डॉ अतुल जौहरी, डॉ रवि सक्सेना, डॉ राजीव वर्मा, डॉ मुजीब, डॉ राजेंद्र कुशवाहा, सहित काफी संख्या में चिकिसको ने अपनी सहभागिता की।

