इंजीनियरिंग छात्रों ने जाना भारत की अंतरिक्ष यात्रा का गौरव
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में इसरो की थीम टचिंग लाइव व्हाइल टचिंग द मून इंडिया स्पेस सागा पर एक विशेष संवाद कार्यक्रम कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के इंजीनियरिंग विद्यार्थियों ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त इसरो वैज्ञानिक एवं नमस्कार फाउंडेशन के मेंटर, अभिषेक सिंह ने छात्रों से सीधा संवाद करते हुए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, चंद्रयान मिशन और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक में नवाचार (इनोवेशन) के लिए प्रेरित किया। आईईटी अयोध्या के निदेशक, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा वैज्ञानिक सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता का गौरवपूर्ण प्रमाण है। यह आयोजन छात्रों को अनुसंधान और तकनीक में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। रामराज्य अयोध्या फाउंडेशन के संस्थापक, हर्षवर्धन सिंह ने कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में विश्व पटल पर मजबूत पहचान बना रहा है। युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करना आज के समय की प्रमुख आवश्यकता है। भविष्य की अंतरिक्ष यात्रा में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह संवाद उनके भीतर नई जिज्ञासा पैदा करेगा। संवाद सत्र के दौरान इंजीनियरिंग छात्रों ने इसरो वैज्ञानिक श्री अभिषेक सिंह से अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी चुनौतियों से जुड़े सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया। कार्यक्रम में नमस्कार फाउंडेशन के संयोजक सौम्य वत्स, पूर्व संकाय अध्यक्ष दिलीप यादव, कई शिक्षकगण और बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग छात्र मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर इलेक्ट्रिकल विभाग के संकायाध्यक्ष अंकित श्रीवास्तव और मैकेनिकल विभाग के संकायाध्यक्ष दिनेश कुमार ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया एवं सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
वैज्ञानिक तरीके से जैविक खेती अपनाकर किसान लाभ कमाएं
अयोध्या। आज किसान खेती की लागत कम करने और खेत की मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। जैविक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और जैव उर्वरकों का उपयोग किया जाता है। जैविक खाद खेत की मिट्टी को भुरभुरा बनाने और उसमें पानी रोकने की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। इससे पौधों को पोषक तत्व धीरे-धीरे मिलते हैं और मिट्टी में लाभकारी जीवाणुओं की सक्रियता बढ़ती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के सस्य विज्ञान विभाग के शोध छात्र सिद्धार्थ मिश्रा ने अपने शोध परिणामो के अनुसार किसानों को सलाह दी है कि किसान अपने खेत में पशुओं से मिलने वाले जैविक पदार्थों का उपयोग करके खेती में बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम कर सकते हैं तथा जैविक खेती में फसल चक्र, मिश्रित खेती और प्राकृतिक कीट नियंत्रण को अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं। इसके प्रयोग से खेत में कीटों एवं रोगों का संतुलित प्रबंधन भी किया जा सकता है। साथ ही, जैविक उत्पादों की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसानों को खाद, बीज और फसल सुरक्षा उपायों का सही तरीके से प्रयोग करना चाहिए। हालांकि जैविक खेती में केवल रासायनिक खाद बंद कर देना पर्याप्त नहीं है। मृदा परीक्षण, उचित जैविक खाद, समय पर निराई-गुड़ाई, फसल विविधता और सही बाजार का ध्यान रखना आवश्यक है। इस प्रकार वैज्ञानिक तरीके से जैविक खेती अपनाकर किसान मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत घटाने और लंबे समय तक टिकाऊ कृषि से बेहतर लाभ प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
अपनाएं जैव उर्वरक, फसल को दें प्राकृतिक पोषण
अयोध्या। खेती में लगातार बढ़ती लागत के बीच जैव उर्वरक किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन रहे हैं। जैव उर्वरक ऐसे लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जो मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों को पौधों के लिए आसानी से उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। इससे पौधों की जड़ों का विकास, पोषक तत्वों का अवशोषण और फसल की बढ़वार बेहतर हो सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली, के अनुसार जैव उर्वरक टिकाऊ पोषक प्रबंधन और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसान राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु, पोटाश घुलनशील सूक्ष्मजीव तथा जिंक घुलनशील जैव उर्वरकों का फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार उपयोग कर सकते हैं। कुछ जैव उर्वरक वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं, जबकि कुछ मिट्टी में बंधे फॉस्फोरस और अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में सहायता करते हैं। जैव उर्वरकों का प्रयोग बीज उपचार, पौध उपचार या मिट्टी में मिलाकर किया जा सकता है। इनका उपयोग हमेशा उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना चाहिए। जैव उर्वरक रासायनिक उर्वरकों का अचानक पूरी तरह विकल्प नहीं हैं, बल्कि मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक प्रबंधन के साथ इनका प्रयोग अधिक प्रभावी रहता है। इसलिए किसान भाई जैव उर्वरकों को अपनी खेती में शामिल करके मिट्टी की सेहत सुधारने, पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करने और फसल उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

