बारबारियोंं में सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा की विदाई:

बारबारियोंं में सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा की विदाई: ko

महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया, कई पंडालों में निभाई गई परंपरा

प्रयागराज‌। प्रयागराज शहर में दुर्गा पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का बुधवार को एकादशी के मौके पर विसर्जन किया जा रहा है। मां की विदाई से पहले पूजा पंडालों में बंगाली समाज की पारंपरिक रस्म सिंदूर खेला का आयोजन हुआ। इस दौरान सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा की आरती उतारी और उन्हें सिंदूर अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर खेला की परंपरा निभाई।

लूकरगंज, इंडियन गर्ल्स, कर्नलगंज, भारद्वाज पार्क और दरभंगा कॉलोनी सहित कई अन्य दुर्गा पूजा पंडालों में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। महिलाओं ने मां दुर्गा के चरणों में सिंदूर अर्पित किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद एक-दूसरे के माथे और चेहरे पर सिंदूर लगाकर इस पारंपरिक रस्म में हिस्सा लिया। पूजा पंडालों में भक्ति और उत्साह का माहौल रहा।

मां दुर्गा की विदाई के मौके पर महिलाओं में जहां उत्साह दिखा, वहीं प्रतिमाओं के विसर्जन की बेला में कई महिलाएं भावुक भी हो उठीं। सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हुए मां को विदाई दी। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि और सुहाग की मंगलकामना की। पंडालों में मां दुर्गा के जयकारों के बीच विदाई की रस्में पूरी की गईं।

सिंदूर खेला बंगाली समाज की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। दुर्गा पूजा के अंतिम चरण में महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इस परंपरा के जरिए मां से सुख, सौभाग्य और खुशहाली की कामना की जाती है। मां दुर्गा को बेटी के रूप में विदा करने की भावना भी इस रस्म से जुड़ी है।

आमतौर पर विजयादशमी यानी दशमी के दिन पूजा-अर्चना के बाद देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। हालांकि, इस बार मुहूर्त के कारण प्रयागराज के कई दुर्गा पूजा पंडालों में एकादशी के दिन प्रतिमाओं को विदाई दी जा रही है। इसके साथ ही दुर्गा पूजा उत्सव का समापन हो र

हा है।

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