(श्रीनगर)जम्मू-कश्मीर सीएम उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से किया निकाह, सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर दी जानकारी

(श्रीनगर)जम्मू-कश्मीर सीएम उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से किया निकाह, सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर दी जानकारी

श्रीनगर ,01 नवंबर ,(आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जानी-मानी वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान एक निजी समारोह में शादी के बंधन में बंध गए हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्सÓ (ङ्ग) पर शादी की खूबसूरत तस्वीरें साझा करते हुए इस नए सफर की औपचारिक जानकारी दी। तस्वीरों के साथ अंगूठी की इमोजी साझा करते हुए उन्होंने निधि राजदान को टैग किया और लिखा कि कल से एक नई खूबसूरत यात्रा की शुरुआत हुई है। राजनीति और मीडिया जगत के दो बेहद चर्चित चेहरों के इस परिणय सूत्र में बंधने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर चारों तरफ से बधाइयों का तांता लग गया है।

दोनों के जीवन का दूसरा अध्याय, लंबे समय बाद हुआ तलाक

यह दोनों ही शख्सियतों के जीवन की दूसरी शादी है। भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में शुमार 54 वर्षीय उमर अब्दुल्ला की पहली शादी पायल नाथ से हुई थी। हालांकि, लंबे समय तक अलग रहने और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कुछ समय पहले ही दोनों के बीच औपचारिक तलाक हुआ था। वहीं, दूसरी ओर 48 वर्षीय पत्रकार निधि राजदान की भी यह दूसरी शादी है। इससे पहले उनका विवाह जाने-माने पत्रकार और लेखक नीलेश मिश्रा के साथ वर्ष 2005 में हुआ था, लेकिन निजी कारणों के चलते यह रिश्ता महज दो साल ही चल सका और 2007 में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया था। तलाक के बाद निधि ने अपना पूरा ध्यान अपने पत्रकारिता करियर पर केंद्रित कर रखा था।

कश्मीरी पंडित परिवार से नाता और पत्रकारिता का लंबा सफर

भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम रहीं निधि राजदान मूल रूप से कश्मीरी पंडित परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता कृष्ण राजदान भी वरिष्ठ पत्रकार रह चुके हैं। निधि ने दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (ढ्ढढ्ढरूष्ट) से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने प्रमुख अंग्रेजी समाचार चैनल एनडीटीवी (हृष्ठञ्जङ्क) से अपने पेशेवर सफर की शुरुआत की। चैनल में उन्होंने लगातार 21 वर्षों तक महत्वपूर्ण बीट्स को कवर किया और प्राइम टाइम एंकर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

हार्वर्ड विवाद और करियर के उतार-चढ़ाव के बाद नई शुरुआत

साल 2020 में निधि राजदान उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने यह घोषणा करते हुए एनडीटीवी से इस्तीफा दे दिया था कि उन्हें प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पत्रकारिता पढ़ाने का प्रस्ताव मिला है। हालांकि, कुछ महीनों की जांच के बाद यह एक संगठित साइबर धोखाधड़ी (फिशिंग स्कैम) निकला, जिसकी जानकारी उन्होंने स्वयं सार्वजनिक की थी। इस घटना के बाद उन्हें व्यापक ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा था। करियर और निजी जिंदगी में आए कई उतार-चढ़ावों के बाद अब उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ निकाह कर अपने जीवन के एक नए और सुखद अध्याय की शुरुआत की है।

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(उत्तरकाशी)उत्तरकाशी में केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन, 8 ट्रेकर्स बर्फीले रास्ते में फंसे, एनडीआरएफ – एसडीआरएफ का संयुक्त रेस्क्यू अभियान शुरू

उत्तरकाशी ,01 नवंबर ,(आरएनएस)। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारताल ट्रेक पर अचानक आए भीषण हिमस्खलन (एवलांच) ने पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भोजखड़क से आगे भारी हिमस्खलन और ग्लेशियर टूटने की वजह से सात ट्रेकर्स और एक सपोर्टिंग स्टाफ समेत कुल आठ लोग बर्फीले इलाके में फंस गए हैं। गनीमत यह रही कि दल के साथ गए चार लोग जिनमें तीन पोर्टर और एक कुक शामिल हैं- कच्ची ढांग के पास पूरी तरह सुरक्षित खोज लिए गए हैं। बर्फीले तूफान और दुर्गम पहाड़ियों के बीच फंसे बाकी आठ लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए शनिवार सुबह से युद्धस्तर पर साझा राहत व बचाव अभियान शुरू किया गया है।

27 अक्टूबर को गंगोत्री से निकला था 13 सदस्यीय दल, बर्फबारी से बंद हुआ रास्ता

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (ष्ठश्वह्रष्ट) से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सात ट्रेकर्स और छह सपोर्टिंग स्टाफ का कुल 13 सदस्यीय दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री धाम से केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुआ था। पूर्व निर्धारित योजना के तहत पूरे दल की वापसी 29 अक्टूबर तक होनी थी। हालांकि, ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक बदले मौसम, कड़ाके की बर्फबारी और रास्ते में ग्लेशियर खिसक आने के कारण पूरा ट्रेकिंग मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिससे दल तय समय पर बेस कैंप नहीं पहुंच सका।

30 अक्टूबर को हुआ था संपर्क, शनिवार से शुरू हुआ बड़े पैमाने पर रेस्क्यू

तय समय पर वापसी न होने और संपर्क कट जाने के बाद प्रशासन ने खोजबीन के प्रयास तेज किए। 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी के सैटेलाइट व फोन संपर्कों के माध्यम से दल से संक्षिप्त बातचीत हो सकी, जिसमें उन्होंने कच्ची ढांग के पास सुरक्षित होने की बात कहते हुए आपातकालीन सहायता की मांग की थी। इसके बाद शनिवार तड़के राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (हृष्ठक्रस्न), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (स्ष्ठक्रस्न), वन विभाग और ट्रेकिंग एजेंसी के विशेषज्ञ पर्वतारोहियों की संयुक्त टीमें रेस्क्यू के लिए रवाना कर दी गईं।

अत्यंत दुर्गम इलाके में रेस्क्यू की चुनौती, हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट करने की तैयारी

केदारताल क्षेत्र समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित होने और तापमान शून्य से नीचे चले जाने के कारण पैदल बचाव दल को आगे बढ़ने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संकरे बर्फीले रास्तों और लगातार गिरती बर्फ की चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने भारतीय वायुसेना या नागरिक उड्डयन विभाग के हेलीकॉप्टरों की मदद लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मौसम साफ होते ही हवाई सर्वे कर फंसे हुए सभी ट्रेकर्स को सुरक्षित एयरलिफ्ट करने की योजना बनाई गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से पहले सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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