(यरूशलम)ट्रंप पर दबाव बना रहे नेतन्याहू, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर हमले की इच्छा
यरुशलम,02 नवंबर। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर हमला करे। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं और ईरान के साथ बातचीत जारी रखना चाहते हैं। इस मुद्दे पर शनिवार को दोनों नेताओं के बीच विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें उनके विचारों में मतभेद सामने आए।
एक रिपोर्ट में इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। इजरायली सूत्र ने दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को काफी जटिल बताया, जबकि अमेरिकी सूत्र ने इसे सीधी बातचीत करार दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप के सामने ईरान पर हमले का मुद्दा उठाते हुए सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बनाया, लेकिन ट्रंप ने फिलहाल इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। बताया जा रहा है कि ट्रंप के इस रुख से नेतन्याहू चिंतित हैं।
ट्रंप ने शनिवार को नेतन्याहू के साथ बातचीत होने की पुष्टि की थी, हालांकि उन्होंने चर्चा के विस्तृत ब्योरे साझा नहीं किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।
इस बीच, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पिछले सप्ताह ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा था। इसमें दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने की संभावना पर चर्चा की गई थी। इसे कई महीनों बाद ईरान के साथ उच्चस्तरीय संपर्क स्थापित करने की अमेरिकी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ वार्ता ठीक चल रही है और वह इस मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन बातचीत के दौरान कई बार अपने रुख से पीछे हट जाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा सीधी बातचीत दोबारा शुरू कराने के लिए कतर के मध्यस्थ लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में कतर के मध्यस्थों ने रविवार को लगातार तीसरे दिन ईरानी अधिकारियों के साथ बैठक की। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खोलने के लिए किसी सहमति पर पहुंचना है।
हालांकि, अभी तक इस दिशा में कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच फिलहाल कोई समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते की संभावना इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका ईरान की ओर से उठाए गए सवालों और चिंताओं का किस तरह जवाब देता है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि एक ओर इजरायल ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर जोर दे रहा है, वहीं अमेरिका फिलहाल कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच आगे की रणनीति को लेकर मतभेद का असर पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी पड़ सकता है।
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