नई दिल्ली महिलाओं के बाल झड़ने के पीछे तनाव, नींद और पाचन की अहम भूमिका, ट्राया हेल्थ की स्टडी में खुलासा

ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
नई दिल्ली। महिलाओं में बाल झड़ने की समस्या के पीछे केवल बाहरी कारण ही नहीं, बल्कि शरीर की अंदरूनी सेहत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ट्राया हेल्थ की ओर से देशभर की 3,80,363 महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। ‘फीमेल हेयर हेल्थ स्टडी’ के अनुसार तनाव, नींद की कमी और पाचन संबंधी समस्याओं का महिलाओं के बालों की सेहत से गहरा संबंध देखने को मिला है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अलग-अलग राज्यों में महिलाओं की इन समस्याओं का स्तर अलग-अलग है।
स्टडी के मुताबिक, अध्ययन में शामिल 95.8 प्रतिशत महिलाओं में बाल झड़ने की समस्या दर्ज की गई। इनमें 53.7 प्रतिशत महिलाओं के बाल पतले होने, 22.1 प्रतिशत की मांग चौड़ी होने और 19.1 प्रतिशत महिलाओं के सिर के किनारों से बाल पतले होने की शिकायत सामने आई।
अध्ययन में पाया गया कि 52 प्रतिशत महिलाएं मध्यम से उच्च स्तर के तनाव से प्रभावित हैं, जबकि 38.1 प्रतिशत महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो रही है। वहीं, 51.7 प्रतिशत महिलाओं को एसिडिटी, गैस, कब्ज और पेट फूलने जैसी पाचन संबंधी परेशानियां हैं। खास बात यह है कि 46.6 प्रतिशत महिलाएं इन तीन में से कम से कम दो समस्याओं से जूझ रही हैं।
तनाव और नींद की कमी भी बन रही वजह
स्टडी के अनुसार लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा सकता है, जिसका असर बालों के विकास चक्र पर पड़ता है। वहीं, पर्याप्त और अच्छी नींद नहीं मिलने से शरीर की कोशिकाओं के नवीनीकरण और मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर बालों की मजबूती और घनत्व पर भी पड़ सकता है।
पाचन संबंधी समस्याओं से पोषण पर असर
अध्ययन में 51.7 प्रतिशत महिलाओं में पाचन संबंधी समस्याएं पाई गईं। विशेषज्ञों के अनुसार आयरन, विटामिन डी और जिंक जैसे पोषक तत्व बालों के विकास के लिए जरूरी हैं। पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण में गड़बड़ी होने पर शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे बालों की सेहत प्रभावित हो सकती है।
अलग-अलग राज्यों में अलग तस्वीर
राज्यों के आंकड़ों में भी काफी अंतर देखने को मिला। पश्चिम बंगाल में तनाव का स्तर 57.7 प्रतिशत और पाचन संबंधी समस्याएं 58.7 प्रतिशत दर्ज की गईं, जो अध्ययन में शामिल राज्यों में सबसे अधिक हैं। तमिलनाडु में 43.1 प्रतिशत महिलाओं को नींद संबंधी परेशानी मिली, जबकि तेलंगाना में यह आंकड़ा 42.1 प्रतिशत रहा। दिल्ली में 56 प्रतिशत महिलाओं को पाचन संबंधी समस्याएं पाई गईं। वहीं उत्तर प्रदेश में तनाव का स्तर 50.1 प्रतिशत, नींद की कमी 34.7 प्रतिशत और पाचन संबंधी समस्याएं 53.2 प्रतिशत दर्ज की गईं।
भीतरी सेहत पर ध्यान देना जरूरी : सलोनी आनंद
ट्राया हेल्थ की सह-संस्थापक सलोनी आनंद ने कहा कि बालों का झड़ना शरीर के भीतर चल रही समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि कई महिलाएं बालों की समस्या के समाधान के लिए तेल, शैंपू और अलग-अलग उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन तनाव, नींद और पाचन की सेहत पर पर्याप्त ध्यान नहीं देतीं। इस अध्ययन का उद्देश्य महिलाओं को बालों की सेहत और शरीर की अंदरूनी स्थिति के बीच संबंध के प्रति जागरूक करना है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन महिलाओं के बाल किनारों से पतले हो रहे हैं या जिनकी मांग चौड़ी हो रही है, उनमें तनाव, नींद की कमी और पाचन संबंधी समस्याओं का स्तर सामान्य रूप से बाल पतले होने वाली महिलाओं की तुलना में अधिक है।
ट्राया हेल्थ के अनुसार बालों की समस्या का समाधान केवल बाहरी उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए तनाव प्रबंधन, बेहतर नींद, संतुलित पोषण और पाचन संबंधी समस्याओं की पहचान पर भी ध्यान देना जरूरी है। कंपनी का कहना है कि बालों की देखभाल के लिए अंदरूनी स्वास्थ्य और स्कैल्प (सिर की त्वचा) दोनों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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