जनपद जौनपुर में 01 अगस्त 2026 से 30 दिसम्बर 2026 तक राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 का आयोजन

जनपद जौनपुर में 01 अगस्त 2026 से 30 दिसम्बर 2026 तक राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 का आयोजन

 

सिविल जज सी0डि0/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर सुशील कुमार सिंह ने अवगत कराया है कि एम0सी0पी0सी0, नई दिल्ली एवं माननीय अध्यक्ष, मीडियेशन व कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी, सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली एवं उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ व माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर श्री सुशील कुमार शशि के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर के तत्वावधान में 01 अगस्त 2026 से 30 दिसम्बर 2026 तक राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 का शुभारम्भ किया जा रहा है।

 

उक्त अभियान का उद्देश्य मध्यस्थता के माध्यम से न्यायालयों में लम्बित प्रकरणों का अधिकाधिक संख्या में निस्तारण किया जायेगा। इस मध्यस्थता अभियान में वैवाहिक विवाद के मामलें, दुर्घटना दावे के मामलें, घरेलू हिंसा के मामलें, चेक बाउंस के मामलें, वाणिज्यिक विवाद के मामलें, सेवा विवाद के मामलें, शमनीय आपराधिक मामलें, उपभोक्ता विवाद के मामलें, ऋण वसूली के मामलें, सम्पत्ति के बंटवारें से सम्बन्धित मामलें, बेदखली से संबंधित मामलें, भूमि अधिग्रहण के मामलें, अन्य उपयुक्त दीवानी मामलें आपसी सुलह-समझौतें के आधार पर निस्तारित किये जायेगें।

 

अतः वादकारीगण एवं अधिवक्ता गण अपने-अपने वादों से सम्बन्धित न्यायालयों में सम्पर्क स्थापित कर वादों को मध्यस्थता हेतु संदर्भित करायें एवं अधिकतम वादों का निस्तारण कराकर उक्त अभियान का लाभ उठायें।

 

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जौनपुर 14 अक्टूबर, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-03

 

अपंजीकृत रसायन साइ्रक्लोसिनोन के क्रय- विक्रय से बचे

 

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने अवगत कराया है कि शासन स्तर से प्राप्त निर्देश के क्रम में जनपद में एक अपंजीकृत खरपतवारनाशी साइक्लोसिनोन के व्यापार, भण्डार और निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

 

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक कुमार ने अवगत कराया कि इसके अनियंत्रित प्रयोग से मानव स्वास्थ के साथ-साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानो के हित में विभाग द्वारा ऐसे अपंजीकृत कृषि-रसायन उत्पादो से सावधान रहने की अपील की जाती है, साथ ही साथ कीटनाशी विक्रेताओ को कड़ी चेतावनी देते हुए आदेशित किया जाता है कि वे इस प्रतिबन्धित रसायन की खरीद-फरोख्त से पूरी तरह दूर रहें, यदि औचक निरीक्षण के दौरान किसी भी विक्रेता के प्रतिष्ठान या गोदाम में यह अपंजीकृत रसायन पाया जाता है तो यह कीटनाशी “अधिनियम 1968” और कीटनाशी नियमावली 1971 का खुला उल्लंघन है उस कीटनाशी विक्रेता के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जायेगी।

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