सद्भावना सम्मेलन में गूंजी भक्ति और गुरु-महिमा की अमृतवाणी

सद्भावना सम्मेलन में गूंजी भक्ति और गुरु-महिमा की अमृतवाणी

माता शबरी के प्रसंग से श्रद्धालुओं को मिला प्रेम, समर्पण और सेवा का संदेश

 

बल्दीराय/सुलतानपुर। पत्ते-पत्ते में उनका ठिकाना है, कण-कण में प्रभु का वास है। उन्हें पाने के लिए आडंबर नहीं, बल्कि निर्मल हृदय, अटूट श्रद्धा और निष्कपट प्रेम की आवश्यकता है। इसी आध्यात्मिक भावधारा के बीच मानव उत्थान सेवा समिति के बैनर तले ग्रामसभा पीरोसरैया में सद्भावना सम्मेलन एवं सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग स्थल देवराज सिंह के यहां आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में भक्ति, सद्भावना और सेवा का संदेश प्रवाहित हुआ।

कार्यक्रम में लखनऊ की प्रभारी महात्मा अंजना बाई जी, महात्मा अमरावती बाई जी तथा सुलतानपुर जिले की प्रभारी महात्मा नीरा बाई जी का आगमन हुआ। इस अवसर पर साध्वी अमरावती बाई जी ने उपस्थित भगवत प्रेमियों को सारगर्भित सत्संग सुनाते हुए प्रभु प्रेम की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने नवरात्र की महाअष्टमी के पावन अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि माता भगवती के चरणों में सच्चा प्रेम और समर्पण प्राप्त होना जीवन का दुर्लभ सौभाग्य है। अपने प्रवचन में उन्होंने रामचरितमानस के माता शबरी प्रसंग का भावपूर्ण चित्रण किया। उन्होंने बताया कि माता शबरी की निष्कपट भक्ति, अटूट प्रतीक्षा और प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य आस्था यह संदेश देती है कि परमात्मा के लिए बाहरी वैभव नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और प्रेम सर्वोपरि हैं। सत्संग के दौरान गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए साध्वी ने माता-पिता एवं गुरुजनों की सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण धर्म बताया। मानस के विभिन्न पावन प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को सदाचार, विनम्रता, सेवा, त्याग और सद्भावना अपनाने की प्रेरणा दी।

सत्संग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन के साथ जीवन में प्रेम, विश्वास और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश दिया। कथाश्रवण में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही । सत्संग स्थल पर सैकड़ों भगवत्प्रेमियों ने कथा पान किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *