(नई दिल्ली)चीन फिर कर रहा चालबाजी!, अरुणाचल सीमा पर कई जगहों पर आमने-सामने हुए सैनिक, आईटीबीपी चीफ बोले- हमारे शौर्य कमांडो तैयार

(नई दिल्ली)चीन फिर कर रहा चालबाजी!, अरुणाचल सीमा पर कई जगहों पर आमने-सामने हुए सैनिक, आईटीबीपी चीफ बोले- हमारे शौर्य कमांडो तैयार

नई दिल्ली ,23 अक्टूबर ,(आरएनएस)। भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारतीय सुरक्षा बलों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों के बीच आमना-सामना होने की जानकारी सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि कुछ स्थानों पर ऐसी स्थितियां अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए आईटीबीपी की नई कमांडो टीम ‘शौर्य कमांडोÓ की सराहना की।

आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने बल की परिचालन क्षमता बढ़ाने, कमांडो इकाइयों के विस्तार और आधुनिक तकनीक को अपनाने की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक और आधुनिक सैन्य उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

ढ्ढञ्जक्चक्क प्रमुख ने कहा कि हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी क्करु्र सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ। इनमें से कुछ परिस्थितियां अभी भी जारी हैं। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में तैनात ‘शौर्य कमांडोÓ टीमों ने सराहनीय प्रदर्शन किया है।

कपूर के मुताबिक, आईटीबीपी की प्रत्येक बटालियन में एक कमांडो टीम पहले ही तैयार की जा चुकी है। अब दो और टीमों के गठन की प्रक्रिया चल रही है। बल का लक्ष्य प्रत्येक बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करना है।

इसके अतिरिक्त, केवल कमांडो अभियानों के लिए एक अलग बटालियन गठित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रस्ताव का खाका जल्द तैयार हो जाएगा। इन विशेष इकाइयों को ढ्ढञ्जक्चक्क की परिचालन क्षमता और पहचान का अहम हिस्सा बनाने की तैयारी है।

सीमा पर बदलती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए ढ्ढञ्जक्चक्क प्रमुख ने ड्रोन तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ड्रोन ने पारंपरिक युद्ध के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव किया है और सुरक्षा बलों को अपनी रणनीतियों तथा क्षमताओं को उसी के अनुरूप विकसित करना होगा।

ढ्ढञ्जक्चक्क हर प्लाटून में ड्रोन यूनिट बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही बल अपने स्तर पर ड्रोन का उत्पादन बढ़ाने और ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित करने पर भी ध्यान दे रहा है।

कपूर ने संकेत दिया कि जल्द ही एक अलग ‘स्ट्राइक कॉर्प्सÓ या विशेष आक्रामक क्षमता वाली सैन्य इकाई तैयार करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ सकता है। हालांकि, इस इकाई की संरचना और परिचालन जिम्मेदारियों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

ढ्ढञ्जक्चक्क के आधुनिकीकरण की योजनाओं के तहत वर्ष 2030 तक अतिरिक्त वित्तीय संसाधन मिलने की उम्मीद जताई गई है। कपूर के अनुसार, करीब 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए निर्धारित करने की योजना है।

इन प्रणालियों का उद्देश्य ड्रोन से पैदा होने वाले संभावित खतरों का मुकाबला करने और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करना है।

आधुनिकीकरण के तहत बल की आवाजाही और उपकरणों को भी बेहतर बनाया जाएगा। इसके लिए विभिन्न प्रकार के भूभागों में चलने वाले वाहन, ऑटोनॉमस ग्राउंड व्हीकल यानी स्वचालित जमीनी वाहन और क्विक रिएक्शन व्हीकल यानी त्वरित प्रतिक्रिया वाहन शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरणों को आधुनिक बनाने की योजना भी है।

ढ्ढञ्जक्चक्क प्रमुख ने चीन की सेना और उसकी सैन्य क्षमताओं में किए गए निवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि बीजिंग ने पारंपरिक युद्ध के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बदलते युद्धक्षेत्र में ड्रोन को ऐसा साधन बताया, जो सैन्य क्षमताओं के बीच अंतर कम करने में मदद कर सकता है।

उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और अपेक्षाकृत कम लागत वाले उपकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यूक्रेन के प्रतिरोध का उल्लेख करते हुए उन्होंने युद्ध के बदलते स्वरूप को रेखांकित किया। उन्होंने ईरान का भी उदाहरण दिया।

उनकी टिप्पणियों से स्पष्ट है कि ढ्ढञ्जक्चक्क भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ तकनीकी क्षमता विकसित करने पर भी जोर दे रही है।

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों की अपनी-अपनी धारणाएं हैं। सीमा के कुछ हिस्सों में इन धारणाओं के अलग होने के कारण गश्त के दौरान आमना-सामना और तनाव की स्थितियां उत्पन्न होती रही हैं।

खबर में उल्लेखित जानकारी के अनुसार, सितंबर में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच कोर कमांडर स्तर की बैठक भी हुई थी। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि हाल में जिन क्षेत्रों में नए मुद्दे सामने आए हैं, वहां चीनी सैनिकों के व्यवहार को लेकर भारतीय सेना ने सख्त रुख अपनाया है।

अब तक रु्रष्ट से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर कोर कमांडर स्तर की बैठकें होती रही हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य सीमा पर तनाव कम करना और लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना रहा है।

ढ्ढञ्जक्चक्क की प्रस्तावित योजनाओं में कमांडो इकाइयों का विस्तार, ड्रोन संचालन, एंटी-ड्रोन प्रणालियां, आधुनिक वाहन और बेहतर हथियार एवं उपकरण शामिल हैं। इन पहलों के जरिए बल की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में परिचालन क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।

अरुणाचल प्रदेश में आमने-सामने की स्थितियों के बीच ढ्ढञ्जक्चक्क का आधुनिकीकरण और विशेष कमांडो इकाइयों का गठन सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रस्तावित बजट, नई इकाइयों के गठन और योजनाओं की समयसीमा को लेकर अंतिम आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही इनके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।

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